Shravan Nakshatra:
रांची। भाई-बहन के अटूट रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन नौ अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहुत ही शुभ और दुर्लभ योग का संयोग बनने जा रहा है। श्रावण माह की पूर्णिमा और रक्षाबंधन एक ही दिन मनाया जाता है। लेकिन, इस बार व्रत की पूर्णिमा 8 अगस्त को है और स्नान-दान की पूर्णिमा 9 अगस्त को मनाई जाएगी।
दिन भर राखी बांधेगी बहनेः
उदयातिथि के होने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। बहनें दिनभर राखी बांध सकेंगी। पंडित रमेश द्विवेदी के अनुसार रक्षाबंधन पर गुरु और शुक्र की युति है। साथ ही श्रावण माह का समापन शनिवार के दिन होगा, जिसमें चंद्रमा शनि के कुंभ राशि में विराजमान होंगे। इससे शनिदेव के साथ-साथ शिवजी की भी विशेष कृपा प्राप्त होगी।
9 अगस्त को सूर्योदय के बाद से पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जाएगा। पंडित ने कहा कि इस रक्षाबंधन में श्रवण नक्षत्र होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो अति शुभ फलदायक है। श्रवण नक्षत्र के साथ आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और जयद योग के शुभ संयोग में रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
पंडित रमेश ने कहा कि इस दिन बहनें भाई की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सफलता की कामना कर कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। भाई-बहन को आजीवन रक्षा का वचन देता है।
हर समाज में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है पर्वः
नेपाली समाज में रक्षाबंधन के दिन बहनें सबसे पहले भाई को चावल का तिलक लगाती हैं। इसके बाद मुंह मीठा कराकर राखी बांधती हैं। इसके अलावा जिनके भाई या बहन नहीं होते वे मंदिर जाकर पंडित से रक्षा सूत्र बंधवाते हैं। मारवाड़ी समाज में महिलाएं रक्षाबंधन से एक दिन पहले दुकान, ऑफिस व घर की दीवारों पर गोबर, चूना से स्वास्तिक बनाकर राम राम लिखती हैं। रक्षाबंधन के दिन खीर-चूरमा, रोली, मौली, चावल व अन्य पूजन सामग्री से पूजा कर कच्चा धागा या राखी लगाती हैं। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है।
ब्रह्मर्षि समाज में रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले शिरा बाबा (कुलदेवता) की पूजा की जाती है। यह पूजा घर की सबसे बड़ी महिला ही करती है। इस दौरान वे अपने कुलदेवता को विधिवत पूजा-अर्चना कर उन्हें तस्मई या खीर का भोग चढ़ाती हैं। कच्चे धागे की सूते की राखी बनाकर उन्हें बांधती है।
परिवारों में भोग का वितरण किया जाता है। कुलदेवता की पूजा के बाद राखी का त्योहार मनाया जाता है। मलयाली समाज में रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भगवान अय्यप्पा का दर्शन करते हैं। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। हालांकि राखी त्योहार का प्रचलन साउथ में नहीं है, लेकिन यहां रहने वाले मलयाली समाज में अब रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा है।
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