Nepal Gen-Z protests:
काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों को लेकर देश की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। प्रदर्शन में मारे गए लोगों के परिजनों ने पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रामेश लेखक के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।
यह शिकायत उन पर मानवता के खिलाफ अपराध, सरकारी शक्ति के दुरुपयोग और निर्दोष नागरिकों की हत्या के आरोपों के तहत की गई है। परिजनों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और बर्बर कार्रवाई का आदेश इन्हीं नेताओं की ओर से दिया गया था।
पिछले माह हुआ था नेपाल में आंदोलनः
सितंबर माह में शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में युवाओं द्वारा शुरू किया गया था। आंदोलन तेजी से पूरे देश में फैल गया और देखते ही देखते यह नेपाल के इतिहास का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बन गया।
70 से अधिक मौतेः
इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि हज़ारों घायल हुए थे।
नेपाल पुलिस ने शिकायत को फिलहाल सीधे एफआईआर के रूप में दर्ज नहीं किया है, बल्कि मामले को न्यायिक जांच आयोग के सुपुर्द किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं।
आयोग का दायित्व है कि वह घटना की निष्पक्ष जांच करे, दोषियों की पहचान करे और सरकार को आगे की कार्रवाई की सिफारिश दे।
राजनीतिक हलचल तेजः
इस पूरे प्रकरण के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जनदबाव और बढ़ते विरोध के बीच ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। वर्तमान में नेपाल में अंतरिम सरकार काम कर रही है, जो जांच की निगरानी के साथ आने वाले चुनाव की तैयारी कर रही है
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। अगर जांच आयोग ने निष्पक्ष रिपोर्ट पेश की तो यह देश में जवाबदेही और पारदर्शिता की नई मिसाल बन सकती है।
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