Leaked document
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी से जुड़े कथित लीक दस्तावेज ने यूरोप में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लीक हुए इस दस्तावेज में दावा किया गया है कि अमेरिका फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की वर्तमान सरकारों को कमजोर कर सत्ता परिवर्तन का रास्ता तैयार करना चाहता है। इस दस्तावेज़ में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को हटाने की योजना का उल्लेख किया गया है। हालांकि, अमेरिका ने इस दस्तावेज़ को पूरी तरह फर्जी करार दिया है और इसके अस्तित्व से इंकार किया है।
ब्रिटिश मीडिया के अनुसार
ब्रिटिश मीडिया के अनुसार, दस्तावेज़ में कहा गया है कि यूरोप को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका को दो प्रमुख रणनीतियों पर काम करने की सलाह दी गई है। यह लीक ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप पहले ही दबाव में है। दस्तावेज़ के दावों के मुताबिक, अमेरिका यूरोप के भीतर राजनीतिक प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए राष्ट्रवादी पार्टियों को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है। हालांकि दस्तावेज़ में किसी पार्टी का नाम सीधे तौर पर नहीं है, लेकिन कोडवर्ड में कही गई बातों का संकेत कुछ खास दलों की ओर जाता है। फ्रांस में मैक्रों के विरोध में मरीन ले पेन की पार्टी, ब्रिटेन में कीर स्टार्मर के खिलाफ रिफॉर्म पार्टी और जर्मनी में मर्ज के खिलाफ एएफडी को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य 2027 तक के चुनावों से पहले हासिल करना है।
इसके अलावा, दस्तावेज में यूरोप के चार राइट-विंग शासित देशों—हंगरी, इटली, पोलैंड और ऑस्ट्रिया—को मुख्यधारा से अलग-थलग करने की रणनीति का भी उल्लेख है। इनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का नाम भी शामिल है, जिनकी अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार खुलकर प्रशंसा कर चुके हैं। दस्तावेज़ के एक हिस्से में सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को उन पार्टियों, संगठनों और सांस्कृतिक हस्तियों का समर्थन करना चाहिए जो यूरोपीय जीवनशैली, संप्रभुता और पारंपरिक मूल्यों की रक्षा की बात करते हों और साथ ही अमेरिका के प्रति सकारात्मक रुख रखते हों। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूरोप पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यूरोप तेजी से पतन की ओर बढ़ रहा है और उसका प्रभाव जल्द ही खत्म हो जाएगा। यह बयान और लीक दस्तावेज एक साथ आने के कारण यूरोप में राजनीतिक हलचल और गहरी हो गई है।







