Vijay Thalapathy last film: विजय थलपति की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज़ पर लगी रोक

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Vijay Thalapathy last film: मद्रास हाई कोर्ट में सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर CBFC और मेकर्स के बीच तीखी बहस

चेन्नई, एजेंसियां। विजय थलपति की बहुप्रतीक्षित और कथित तौर पर आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज़ पर फिलहाल रोक बरकरार है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई मद्रास हाई कोर्ट में हुई, जहां सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) और फिल्म के निर्माता KVN प्रोडक्शंस के बीच सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर गहन बहस देखने को मिली। फिल्म का बजट लगभग 500 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिसे लेकर निर्माता पक्ष ने देरी से हो रहे भारी आर्थिक नुकसान का हवाला दिया।

CBFC की ओर से अदालत में क्या बताया गया?

CBFC की ओर से अदालत को बताया गया कि फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने की जानकारी 6 जनवरी को ही प्रोड्यूसर्स को दे दी गई थी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि फिल्म में सुझाए गए 14 कट केवल शुरुआती सुझाव थे, न कि अंतिम फैसला। CBFC ने यह भी कहा कि बोर्ड के चेयरपर्सन ने अब तक फिल्म को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए क्या कहा?

वहीं, मेकर्स ने कोर्ट में दलील दी कि रिलीज़ में हो रही देरी से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “आप केवल अपनी लागत का हवाला देकर राहत की मांग नहीं कर सकते।” CBFC की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरेशन ने यह भी कहा कि सेंसर सर्टिफिकेट जारी होने से पहले ही रिलीज़ डेट घोषित करना उचित नहीं था।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने CBFC से सवाल किया कि फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का फैसला क्यों लिया गया और इसकी सूचना चेन्नई या मुंबई ऑफिस से भेजी गई थी। जवाब में बताया गया कि यह सूचना मुंबई ऑफिस से भेजी गई थी।

क्या है मामला?

गौरतलब है कि फिल्म को पहले 9 जनवरी 2026 को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन सेंसर बोर्ड को मिली एक शिकायत के बाद रिलीज़ रोक दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म के कुछ दृश्य सेना की छवि को गलत तरीके से पेश करते हैं और इससे भावनाएं आहत हो सकती हैं। इससे पहले मेकर्स ने इस रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली।

अब अदालत KVN प्रोडक्शंस की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगी कि फिल्म की रिलीज़ पर तुरंत फैसला सुनाया जाए या मामले को अगली सुनवाई के लिए टाल दिया जाए।

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