Zila Panchayat members:
नैनीताल, एजेंसियां। नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर पांच कांग्रेस समर्थित निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों के लापता होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इन लापता सदस्यों ने एक वीडियो जारी कर स्पष्ट किया है कि उनका अपहरण नहीं हुआ है, बल्कि वे अपनी मर्जी से कहीं गए थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
कांग्रेस का आरोप और प्रदर्शन
14 अगस्त को जब यह जिला पंचायत सदस्य मतदान स्थल से गायब हो गए थे, कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि उसने इन सदस्यों को चुनाव में वोट डालने से रोकने के लिए उनका अपहरण कर लिया। इसके बाद, 15 अगस्त को कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में हल्द्वानी एसएसपी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने यह आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर यह अपहरण हुआ है, लेकिन एसपी सिटी के आश्वासन के बाद उनका विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया।
क्या है पूरा मामला?
हालांकि, 16 अगस्त को वायरल हुए वीडियो में लापता जिला पंचायत सदस्यों ने कहा कि उन्हें कोई खतरा नहीं था और उनका अपहरण नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से चले गए थे। इस मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी सक्रिय हो गया है। 15 अगस्त को कांग्रेस ने इस मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसे “अपहरण” करार दिया था। इसके बाद, 16 अगस्त को जिलाधिकारी वंदना सिंह ने उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया कि अगर पुनर्मतदान का आदेश दिया जाता है तो राज्य निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया जाएगा।
मामले की आगे की प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की मतगणना कड़ी सुरक्षा में करवाई और परिणामों को सील कर दिया। यह सील लिफाफा 18 अगस्त को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां अदालत के आदेश के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
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