Veerabhadran Ramanathan Crafoord Prize
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय मूल के क्लाइमेट साइंटिस्ट वीरभद्रन रामनाथन को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने क्राफोर्ड पुरस्कार से सम्मानित किया। क्राफोर्ड को ‘नोबेल ऑफ जियोसाइंस’ भी कहा जाता है। ये पुरस्कार रामनाथन को एटमॉसफेरिक ब्राउन क्लाउड पर रिसर्च के लिए दिया गया है।
क्या है रिसर्च मे
इस रिसर्च में बताया गया है कि कैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जिसका उपयोग रेफ्रिजरेशन में होता है, ये कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में वायुमंडल के लिए 10,000 गुना ज्यादा खतरनाक है।रामनाथन मदुरै में जन्मे और चेन्नई में पले-बढ़े हैं। उन्हों ने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी और इंडियन साइंस इंस्टीट्यूट से डिग्री हासिल की है।रामनाथन ने सिकंदराबाद में एक रेफ्रिजरेटर फैक्ट्री में इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया, जहां उन्होंने पहली बार CFC संभाला।
क्लाइमेंट चेज पर करते रहे काम
रामनाथन, स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एड्वाइजर और सैन डियागो में प्रोफेसर रहे।क्लाइमेट चेंज के लिए रामनाथन को स्पेनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल ने फाउंडेशन फ्रंटियर्स ऑफ नॉलेज अवार्ड दिया।क्राफोर्ड अवॉर्ड में 8 मिलियन स्वीडिश क्रोनर का कैश प्राइज और गोल्ड मेडल दिया जाता है।
