Chhath puja Nahay-Khaay: आज से आस्था का महापर्व छठ आरंभ, जानें नहाय-खाय के नियम, विधि और महत्व

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Chhath puja Nahay-Khaay:

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज से पूरे देश में आस्था और श्रद्धा का महापर्व छठ पूजा आरंभ हो गया है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित है। व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।

नहाय-खाय के नियम

नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा के लिए गंगाजल, फूल और गुड़ मिलाकर तांबे के लोटे में जल अर्पित किया जाता है। रसोई और बर्तनों की पूरी शुद्धता रखी जाती है। व्रती स्वयं शुद्ध भोजन बनाते हैं और पहले भगवान को भोग लगाकर भोजन ग्रहण करते हैं।

नहाय-खाय के दिन अरवा चावल, चने की दाल, घीया या कद्दू की सब्जी मुख्य रूप से बनाई जाती है। बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में नोनी का साग, पकोड़े और कुट्टू के आटे की पूरी भी बनाई जाती है। पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांसाहार का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रती को भूमि पर विश्राम करना चाहिए और चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। छठ पूजा की सामग्री में ठेकुआ, फल, सूप, दउरा, दीपक, कपूर, गुड़, दूध, गंगाजल, आम के पत्ते और लाल कपड़ा शामिल होता है। यह सभी सामग्री सूर्य देव को अर्घ्य देने और छठी मैया की पूजा के लिए आवश्यक होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत रामायण और महाभारत काल से हुई थी। माता सीता ने सूर्य देव की पूजा कर इस परंपरा की शुरुआत की थी। महाभारत काल में द्रौपदी ने छठ व्रत किया था जिससे उनके सभी संकट दूर हुए। सूर्यपुत्र कर्ण भी सूर्य देव के भक्त थे जिन्होंने अर्घ्य अर्पित कर महान योद्धा बनने का आशीर्वाद पाया। छठी मैया को ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना गया है। वे संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की देवी हैं। उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

नहाय-खाय के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, गाय को रोटी खिलाना और दान देना शुभ माना जाता है। यह दिन श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है।अगले तीन दिनों में खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की विधियों के साथ छठ महापर्व का उल्लास चरम पर रहेगा। देशभर में घाटों पर व्रती और श्रद्धालु सूर्य देव की आराधना में लीन रहेंगे

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