Supreme Court strict Bodh Gaya:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को रद्द करने और उसकी जगह एक केंद्रीय कानून लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। यह याचिका मंदिर के प्रबंधन को लेकर उठ रही संवैधानिक और धार्मिक चिंताओं को लेकर दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करता है, जो ऐसे किसी भी कानून को असांविधानिक घोषित करता है जो मूल अधिकारों के खिलाफ हो। याचिका में यह भी कहा गया है कि महाबोधि मंदिर परिसर दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है और इसका प्रबंधन केवल बौद्ध समुदाय के माध्यम से होना चाहिए।
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह
मामला जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ के सामने आया, जिन्होंने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका एक पहले से लंबित समान प्रकृति की याचिका के साथ संयुक्त रूप से सुनी जाएगी।महाबोधि मंदिर, बोधगया (बिहार) में स्थित है और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मंदिर परिसर में एक 50 मीटर ऊंचा मुख्य मंदिर, पवित्र बोधि वृक्ष, वज्रासन, कमल सरोवर और अन्य कई ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं।
याचिका की क्या है मांग ?
याचिका में यह भी मांग की गई है कि मंदिर क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया जाए।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी अधिनियम को चुनौती देने वाली एक पूर्व याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा था।
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