Liquor shops in Delhi
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के भीतर स्थित शराब दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव और संचालन पर स्थगन लगा दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ का रुख
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने शराब विक्रेताओं और राजस्थान सरकार की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश का क्रियान्वयन नहीं होगा। हालांकि, पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि हाईकोर्ट की चिंता वास्तविक है और राज्य सरकार भविष्य में शराब नीति बनाते समय इन पहलुओं पर विचार कर सकती है।
राज्य सरकार की दलील
राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही वर्ष 2016 में हाईवे के किनारे शराब दुकानों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। उन्हीं निर्देशों के आधार पर राज्यों ने समय-समय पर अपनी आबकारी नीतियों में बदलाव किए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट का ताजा आदेश व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।
शराब विक्रेताओं को राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से राजस्थान में हाईवे के आसपास संचालित शराब दुकानों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब इन दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने की बाध्यता नहीं रहेगी। मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही तय होगा। तब तक राजस्थान हाईकोर्ट का 500 मीटर के दायरे में शराब दुकान हटाने वाला आदेश लागू नहीं रहेगा।
