Sugar MSP hike news: केंद्र ने बढ़ाई चीनी MSP, सिद्धारमैया बोले-“मेरी पहल से बदला फैसला”

Anjali Kumari
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Sugar MSP hike news:

बैंगलोर, एजेंसियां। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने पर विचार करने का निर्णय उनकी पहल का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने चीनी MSP बढ़ाने की मांग रखी थी, जिसके बाद केंद्र ने इस दिशा में कदम बढ़ाया।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को घोषणा की थी कि केंद्र सरकार 2025-26 के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दे रही है और उद्योग की मांग के अनुरूप MSP बढ़ाने पर भी विचार करेगी। वर्तमान MSP फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो तय है, जबकि उद्योग संगठन ISMA इसे बढ़ाकर 40 रुपये करने की मांग कर रहा है। सिद्धारमैया का कहना है कि उन्होंने पीएम से MSP को 41 रुपये प्रति किलो करने की मांग की थी।

गन्ना किसानों और मिलों को राहत की उम्मीद:

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कहा कि चीनी मिलों ने लंबे समय से MSP में बढ़ोतरी न होने के कारण आर्थिक दबाव की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि किसानों और मिलों दोनों की समस्याओं को उठाते हुए उन्होंने भी प्रधानमंत्री से MSP बढ़ाने का आग्रह किया था।
शिवकुमार ने कहा, “अगर फैक्ट्री चलेगी तो किसान भी रहेंगे। और किसान रहेगा तो फैक्ट्री भी।”केंद्र बिजली, ब्याज दर, इथेनॉल नीति और गन्ने से जुड़े कई मामलों में निर्णय लेता है। ऐसे में कर्नाटक सरकार ने “न्यायसंगत सुधारों” की मांग की थी, जिस पर अब सकारात्मक संकेत मिले हैं।

किसानों के विरोध के बीच तेजी से बढ़ी गतिविधियां:

हाल ही में कर्नाटक में गन्ना किसानों के बड़े आंदोलन हुए थे। किसानों का आरोप था कि MSP बढ़ाए बिना मिलों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है, जिससे सही भुगतान में देरी होती है।

विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया और किसानों को प्रति टन 100 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश जारी किया,जिसमें 50 रुपये सरकार और 50 रुपये मिलें देंगी।इससे किसानों को 3,200–3,300 रुपये प्रति टन का भाव मिलने लगा है।

सिद्धारमैया ने पीएम को दिए ज्ञापन में MSP बढ़ाने के साथ-साथ कर्नाटक की डिस्टिलरी के लिए इथेनॉल खरीद की गारंटी की मांग भी शामिल की थी। अब केंद्र के रुख में बदलाव से किसानों, मिल मालिकों और राज्य सरकार, तीनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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