Valmiki Jayanti:
नई दिल्ली, एजेंसियां। महर्षि वाल्मीकि जयंती 2025: हिंदू धर्म के पवित्र महाकाव्य रामायण (Ramayan) के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जीवन अद्भुत और प्रेरणादायक है। प्रारंभिक जीवन में उनका नाम रत्नाकर था और वे डाकू हुआ करते थे। रत्नाकर का जन्म अंगिरा गोत्र के ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन बचपन में उनका अपहरण एक भीलनी ने कर लिया और उसने उनका पालन-पोषण किया। बड़े होकर रत्नाकर भी अपने गुजर-बसर के लिए लूटपाट करने लगा।
महर्षि वाल्मीकि की कहानी
एक दिन रत्नाकर ने जंगल में नारद मुनि को लूटने का प्रयास किया। नारद जी ने उनसे पूछा कि क्या वे अपने कर्मों के पाप में अपने परिवार को भागीदार बनाना चाहते हैं। जब रत्नाकर ने यह पूछा तो उनके परिवार ने पाप में भागीदार बनने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद रत्नाकर ने नारद मुनि को मुक्त किया और क्षमा मांगी। नारद मुनि ने उन्हें राम का नाम जपने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
रत्नाकर जब राम नाम जपना शुरू किया तो उनके मुख से ‘मरा-मरा’ शब्द निकलने लगा। नारद मुनि ने कहा कि इसी रूप में जपो, तुम्हें राम अवश्य मिलेंगे। इसके बाद रत्नाकर तपस्या में लीन हो गए और शरीर पर दीमक बैठ गई। उनकी इस तपस्या और भक्ति से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए और उन्हें ‘वाल्मीकि’ नाम दिया, जिसका अर्थ है दीमकों के घर से उत्पन्न।
महर्षि वाल्मीकि जयंती
ब्रह्माजी ने वाल्मीकि को रामायण की रचना करने के लिए प्रेरित किया और इसी प्रकार डाकू रत्नाकर आदिकवि वाल्मीकि बन गए।आज महर्षि वाल्मीकि जयंती पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अमृत कलश शोभायात्रा आयोजित की जाती है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि सही भक्ति और तपस्या से जीवन में परिवर्तन संभव है, और कोई भी व्यक्ति अपने कर्म और समर्पण से महानता प्राप्त कर सकता है।
इसे भी पढ़े








