Reliance stops buying Russian oil:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी निर्यात-उन्मुख रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर दिया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि यह फैसला यूरोपीय संघ (EU) की सख्त पाबंदियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
SEZ रिफाइनरी में 20 नवंबर से रूसी तेल बंद:
रिलायंस, जो भारत में रूसी कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार है, जामनगर स्थित अपने विशाल शोधन परिसर में दो रिफाइनरियां संचालित करती है—एक SEZ (Special Economic Zone) यूनिट, जो यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों को ईंधन निर्यात करती है; वहीं दूसरी घरेलू बाजार के लिए काम करती है।
EU ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए रूसी कच्चे तेल से बने ईंधनों के आयात व निर्यात पर कड़ाई से रोक लगाई है। इसी वजह से RIL ने 20 नवंबर से अपनी SEZ रिफाइनरी में रूसी कच्चा तेल लेना बंद कर दिया। कंपनी ने कहा कि 1 दिसंबर से होने वाला पूरा निर्यात अब गैर-रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों से ही होगा।
अमेरिका के नए प्रतिबंध भी बने वजह:
यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार रूस पर प्रतिबंधों की नई खेप लागू की है। इसमें रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर सीधी पाबंदी शामिल है।रिलायंस का रोसनेफ्ट के साथ 5 लाख बैरल प्रतिदिन (500,000 BPD) कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद RIL पर दबाव बढ़ा था कि वह इस आयात को रोक दे।
ट्रेड टेंशन के बीच भारत-अमेरिका संबंधों पर असर:
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत से कुछ आयातित वस्तुओं पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया था। माना जा रहा है कि रूस से भारत की तेल खरीद इस तनाव का एक कारण बनी। ऐसे में RIL का यह कदम दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं को संतुलित करने की दिशा में भी देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक दबाव, EU की सख्ती और अमेरिकी प्रतिबंध तीनों ने मिलकर रिलायंस की तेल रणनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है।













