President Olchiki Ceremony:
जमशेदपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 29 दिसंबर को Jamshedpur आएंगी। यहां वे ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर करनडीह में आयोजित शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस जानकारी की पुष्टि ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के महासचिव रवींद्रनाथ मुर्मू ने की।
1925 में विकसित हुई थी लिपिः
संताली भाषा की लिपि ओलचिकी वर्ष 1925 में विकसित हुई थी और 2025 में इसके 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी ऐतिहासिक अवसर पर करनडीह स्थित दिशोम जाहेर थान में विशेष शताब्दी कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
22 से 29 दिसंबर तक चलेगा आयोजनः
कार्यक्रम की शुरुआत 22 दिसंबर को संताली दिवस के अवसर पर होगी। इसके बाद कई साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे-
- 22 दिसंबर: संताली दिवस और शताब्दी वर्ष कार्यक्रम की शुरुआत
- 27 दिसंबर: साहित्य अकादेमी और संताली राइटर्स एसोसिएशन द्वारा साहित्यिक संध्या
- 28 दिसंबर: ओलचिकी लिपि पर सेमिनार
- 29 दिसंबर: समापन समारोह, अवॉर्ड सेरेमनी, संताली भाषा और ओलचिकी लिपि संरक्षण के लिए कार्य करने वाले साहित्यकारों और चिंतकों का सम्मान
ओलचिकी लिपि के जनक: पंडित रघुनाथ मुर्मू
ओलचिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू (1905–1982) ने 1925 में किया था। ओडिशा के मयूरभंज निवासी रघुनाथ मुर्मू संताली समाज में “गुरु गोमके” के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनकी बनाई ओलचिकी लिपि आज संताली भाषा की आधिकारिक लेखन प्रणाली मानी जाती है।
NIT Jamshedpur के दीक्षांत समारोह में भी शामिल हो सकती हैं राष्ट्रपतिः
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा के दौरान NIT जमशेदपुर का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किए जाने की संभावना है। यदि कार्यक्रम तय होता है, तो राष्ट्रपति इसमें भी शामिल हो सकती हैं।
