Government spending election promises: लोगों की बुनियादी जरूरतें नहीं हो रही पूरीः कमाई खर्च हो रही चुनावी वादे पूरे करने में

4 Min Read

Government spending election promises:

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार में चुनावों से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए अब तक ₹33,920 करोड़ के वादे किए गए हैं। लेकिन, लोकलुभावन वादों के साथ सत्ता में आए सियासी दलों को राज्यों में वित्तीय मोर्चे पर बड़ी मुश्किल आ रही है। हालात ऐसे हो गये हैं कि कमाई का ज्यादा हिस्सा चुनावी वादों को पूरा करने में खर्च हो जा रहा है। वहीं लोगों की बुनियादी जरूरते पूरी नहीं हो पा रही हैं।

अन्य सरकारी खर्चों में हाथ तंगः

ब्याज अदायगी और वेतन-भत्ते जैसे खर्च तो काट नहीं सकते। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा चुनावी वादे पूरे करने में जा रहा है। इसके चलते सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकारी खर्च में उनके हाथ तंग हैं।

झारखंड भी कर रहा मोटा खर्चः

झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार पिछले चुनाव में भारी बहुमत से जीती। इस जीत में मंईयां सम्मान योजना की प्रमुख भूमिका रही। झारखंड सरकार की फिलहाल इस योजना पर सालाना 15 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

तेलंगाना 57% खर्च चुनावी वादों में कर रहाः

तेलंगाना सरकार की कमाई का 57% चुनावी वादों में, कमाई का 80% हिस्सा वेतन-भत्तों पर जा रहा है। यही सरकार पुरानी पेंशन का वादा लाई थी। लाड़ली बहन योजना पर कमाई का 22% हिस्सा चला जाता है।

कर्नाटक 35% खर्च कर रहाः

6 गारंटी के वादे के साथ सत्ता में आई कर्नाटक सरकार की कमाई का 35% हिस्सा इन्हीं गारंटी को पूरा करने में जा रहा है। 40% राशि वेतन-भत्ते और कर्ज के ब्याज चुकाने में चली जाती है। इससे राज्य सरकार को सड़क की मरम्मत तक के लिए बजट जुटाने में दिक्कतें आ रही हैं।

उधार लेने में एमपी टॉप परः

2024-25 में जिन बड़े राज्यों में उधारी बढ़ी, उनमें मध्य प्रदेश टॉप पर है। कमाई का 42% वेतन-भत्ते, ब्याज, 27% मुफ्त की योजना में जा रहा है। छत्तीसगढ़ में खुद की कमाई की 18% राशि वादे पूरे करने पर खर्च हो रही है। स्वास्थ्य पर खर्च घटा है।

बिहार: ₹33,920 करोड़ के नए वादे, 62% खर्च होगाः

बिहार सरकार ने आगामी चुनाव के लिए ₹33,920 करोड़ के नए वादे किए। इन पर खुद की कमाई का 62.46% खर्च हो जाएगा। अगली सरकार इन वादों से सत्ता में आई तो सरकार का खर्च 1.26 लाख करोड़ हो जाएगा, जो कुल कमाई का 233.52% हो जाएगा। यानी कमाई से खर्च 133.32% ज्यादा हो जाएगा।
2024-25 में टैक्स से कमाई ₹54,300 करोड़ थी। वेतन-भत्ते, पेंशन, कर्ज का ब्याज चुकाने में कमाई का 171% खर्च करता है। शेष पैसा केंद्र से विशेष पैकेज में मिलता है।

राज्यों का सोशल वेलफेयर खर्च बढ़ाः

देश की प्रमुख प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, राज्यों का सोशल वेलफेयर खर्च बढ़ गया है। खपत को बढ़ावा देने के लिए बाजार से कर्ज लेकर खर्च कर रहे हैं। इससे वित्तीय सेहत बिगड़ रही है। आरबीआई भी चेता चुका है कि बेवजह खर्चे आर्थिक परेशानियां खड़ी करेंगे।

इसे भी पढ़ें

Assembly Elections 2025: बिहार चुनाव 2025: कांग्रेस का वादा, महागठबंधन की सरकार बनने पर महिलाओं को हर माह मिलेगा ₹2500

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं