Pan masala tax increase:
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार आज लोकसभा में दो बड़े बिल पेश करने जा रही है, जिनका उद्देश्य तंबाकू, पान मसाला और अन्य ‘सिन गुड्स’ पर मौजूदा टैक्स भार को बनाए रखना है। GST मुआवजा सेस जल्द समाप्त होने वाला है, लेकिन सरकार चाहती है कि इन हानिकारक उत्पादों पर टैक्स पहले की तरह ही ऊंचा बना रहे और राजस्व में कमी न आए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले इन बिलों के जरिए सरकार तंबाकू-पान मसाला पर एक्साइज ड्यूटी और नए सेस के माध्यम से टैक्स संरचना को मजबूत करना चाहती है।
पहला बिल सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 है, जो मौजूदा जीएसटी मुआवजा सेस को रिप्लेस करेगा। यह सिगरेट, सिगार, जर्दा, चबाने वाला तंबाकू और अन्य तंबाकू उत्पादों पर लागू होगा। इस बिल का मुख्य उद्देश्य सरकार को यह वित्तीय स्पेस देना है कि मुआवजा सेस खत्म होने के बाद भी वह एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर समान टैक्स का प्रभाव बनाए रख सके। अब इन उत्पादों पर जीएसटी की 40 प्रतिशत दर के साथ नया एक्साइज ड्यूटी भी लगाया जाएगा।
दूसरा बिल हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 है, जो पान मसाला जैसे उत्पादन पर विशेष सेस लगाने का प्रस्ताव करता है। इस सेस का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोष का निर्माण करना है। यह सेस किसी भी अन्य टैक्स या शुल्क के अतिरिक्त होगा। कंपनियों को अपने हर कारखाने में लगी मशीनों की स्व-घोषणा देनी होगी और सेस की गणना प्रति परिसर की जाएगी। सरकार को यह अधिकार भी मिलेगा कि वह अन्य उत्पादों को भी इस सेस के दायरे में शामिल कर सके।
जीएसटी मुआवजा सेस समाप्त:
जीएसटी मुआवजा सेस इसलिए समाप्त हो रहा है क्योंकि 2017 में जीएसटी लागू होने के समय राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए इसे पांच वर्षों के लिए लागू किया गया था, जिसकी अवधि बाद में 2026 तक बढ़ा दी गई थी ताकि कोविड काल में लिए गए कर्ज को चुकाया जा सके। यह कर्ज दिसंबर 2025 में पूरी तरह चुका दिया जाएगा, जिसके बाद मुआवजा सेस की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। लेकिन सरकार चाहती है कि तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम न हो, इसलिए नया टैक्स ढांचा लागू किया जा रहा है।
