Indus water:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी और युद्ध की धमकियों का सिलसिला पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को खुली धमकी दी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि “भारत अगर पानी रोकने की कोशिश करेगा तो उसे ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि वह कानों को हाथ लगाएगा।”
क्या है मामला?
इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शरीफ ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पाकिस्तान अपने हक का पानी किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा, “मैं आज दुश्मन को बताना चाहता हूं कि अगर आप हमारा पानी रोकने की धमकी देते हैं, तो यह बात ध्यान में रखें कि आप पाकिस्तान के पानी की एक बूंद भी नहीं छीन सकते।” यह बयान उस वक्त आया है जब भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ढांचे पर गंभीर चोट पहुंचाई गई थी और इसके बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था।
पाक सेना और नेताओं की आक्रामकता
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में अमेरिका के फ्लोरिडा में पाकिस्तानी प्रवासियों को संबोधित करते हुए परमाणु हमले की अप्रत्यक्ष धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि “अगर हम तबाह होंगे, तो आधी दुनिया को साथ लेकर जाएंगे।” साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत ने पानी रोका तो पाकिस्तान भारतीय बांधों पर मिसाइलें दागने से नहीं चूकेगा। वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को युद्ध की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “अगर भारत ने समझौते को बहाल नहीं किया, तो यह हमारी सभ्यता और अस्तित्व पर हमला माना जाएगा।”
भारत का कड़ा जवाब
भारत ने इन बयानों को गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार देते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “भारत किसी भी प्रकार के परमाणु ब्लैकमेल या दबाव की राजनीति के आगे नहीं झुकेगा। हमारी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा है और इसके लिए हम सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।” भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की यह बयानबाजी उसकी परमाणु कमान और नियंत्रण प्रणाली की गंभीर विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
सिंधु जल समझौता – टकराव की जड़
सिंधु जल संधि, जिसे 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में साइन किया गया था, अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गई है। भारत का कहना है कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”, और जब तक पाकिस्तान अपनी सरज़मीं से भारत में आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं होगी।
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