Vote-stealing issue
श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे से खुद को और अपनी पार्टी को अलग कर लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कांग्रेस का राजनीतिक मुद्दा है और INDIA गठबंधन में शामिल अन्य दलों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उमर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक केंद्र सरकार, बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर है।
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
सोमवार को मीडिया से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर राजनीतिक पार्टी को अपना एजेंडा तय करने का अधिकार है। कांग्रेस ने वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है, ऐसे में बाकी दलों को उस पर टिप्पणी करने या समर्थन जताने की कोई मजबूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि INDIA गठबंधन कोई एकल एजेंडा वाला मंच नहीं है, बल्कि विभिन्न दलों का साझा राजनीतिक गठबंधन है।
उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस INDIA गठबंधन की एक घटक है, लेकिन उनके इस बयान को गठबंधन के भीतर मतभेद के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लोकसभा में संख्या के लिहाज से कांग्रेस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है और वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में जुटी है, जबकि अन्य सहयोगी दल इससे दूरी बनाए हुए नजर आ रहे हैं।
क्या है मामला?
गौरतलब हो कि हाल ही में कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक बड़ी रैली आयोजित की थी। इस रैली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को कमजोर करने और लोगों के मतदान अधिकार को छीनने की साजिश का आरोप लगाया।कांग्रेस का दावा है कि उसने वोट चोरी के खिलाफ करीब छह करोड़ हस्ताक्षर जुटाए हैं, जिन्हें वह राष्ट्रपति को सौंपेगी। वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली में वोट चोरी करने वालों को “गद्दार” करार देते हुए कहा था कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्हें सत्ता से हटाना जरूरी है।उमर अब्दुल्ला के बयान से साफ है कि वोट चोरी का मुद्दा फिलहाल कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई है, न कि पूरे INDIA गठबंधन की साझा मुहिम।







