Mukesh Ambani: रूसी तेल पर मुकेश अंबानी की रिलायंस को मिली एक महीने की मोहलत, जानिए पूरा मामला

Anjali Kumari
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Mukesh Ambani

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका द्वारा रूस की प्रमुख तेल कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए एक महीने की विशेष छूट मिली है। वॉशिंगटन से मिली इस अस्थायी राहत के चलते रिलायंस को रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट से तेल की खेपें मिलती रहीं। इस छूट की जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन मामले से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

रूसी ऊर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध

अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी ऊर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के तहत वैश्विक कंपनियों को 21 नवंबर तक इन रूसी कंपनियों के साथ अपने लेन-देन को धीरे-धीरे समाप्त करने का समय दिया गया था। हालांकि, रिलायंस को इस अवधि में अस्थायी राहत दी गई, जिससे कंपनी पहले से तय किए गए सौदों को पूरा कर सकी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का रोसनेफ्ट के साथ एक दीर्घकालिक समझौता है, जिसके तहत कंपनी प्रतिदिन लगभग 5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदती है। इस तेल को गुजरात स्थित रिलायंस के जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में प्रोसेस किया जाता है, जिसकी क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रति दिन है और जिसे दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स माना जाता है।

भारतीय रिफाइनरियों की चुनौतियां बढ़ी

इस बीच, यूरोपीय संघ के नए नियमों ने भारतीय रिफाइनरियों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। यूरोपीय संघ ने घोषणा की है कि 21 जनवरी के बाद वह उस ईंधन का आयात नहीं करेगा, जो ऐसे रिफाइनरियों में तैयार हुआ हो, जहां बिल ऑफ लोडिंग की तारीख से 60 दिन पहले रूसी तेल प्रोसेस किया गया हो। इससे भारत से यूरोप को ईंधन निर्यात करना और अधिक जटिल हो सकता है।

ट्रेड डेटा एजेंसी क्लर के अनुसार, 22 नवंबर के बाद से रिलायंस को रोसनेफ्ट से लगभग 15 तेल की खेपें मिल चुकी हैं। इस पर रिलायंस ने सफाई देते हुए कहा है कि ये सभी सप्लाई पहले से हुए समझौतों के तहत हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के नियमों का पालन करते हुए पूरी की जा रही हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि रोसनेफ्ट के साथ आखिरी कार्गो 12 नवंबर को लोड किया गया था।

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। हालांकि, अमेरिका लगातार भारत पर रूसी तेल आयात को कम करने का दबाव बना रहा है। अनुमान है कि दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 12 से 15 लाख बैरल प्रति दिन रह सकता है, जो नवंबर के मुकाबले कम होगा।

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