Coffee after menopause:
नई दिल्ली, एजेंसियां। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक चरण है, जो आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच आता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, खासतौर पर एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। इसके चलते महिलाओं को हॉट फ्लैशेस, नींद की कमी, मूड स्विंग, थकावट, हड्डियों का कमजोर होना और मानसिक बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में खानपान और लाइफस्टाइल का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
मेनोपॉज के दौरान क्या क्या दिक्कतें होती है
कई महिलाएं मेनोपॉज के दौरान थकान और सुस्ती से बचने के लिए कॉफी का सहारा लेती हैं। सीमित मात्रा में कॉफी पीने से मूड बेहतर हो सकता है, दिमाग अलर्ट रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। कैफीन दिमाग को सक्रिय करता है, जिससे चिड़चिड़ापन और थकान कुछ हद तक कम हो सकती है।हालांकि, ज्यादा कॉफी पीना मेनोपॉज के बाद गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक कैफीन हड्डियों की मजबूती को कमजोर कर सकता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। मेनोपॉज के समय पहले से ही हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और कॉफी इस समस्या को और बढ़ा सकती है।
मेनोपॉज में पहले ही अनिद्रा की समस्या आम होती है
इसके अलावा, ज्यादा कैफीन नींद पर बुरा असर डालता है। मेनोपॉज में पहले ही अनिद्रा की समस्या आम होती है, और कॉफी इसे और गंभीर बना सकती है। कैफीन हॉट फ्लैशेस, तेज पसीना, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट और बेचैनी जैसी समस्याओं को भी ट्रिगर कर सकता है।पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे एसिडिटी, अपच और पेट दर्द भी ज्यादा कॉफी पीने से बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है और एंग्जायटी व तनाव बढ़ सकता है।






