Maharashtra Haj Committee:
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र हज कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद पर एक हिंदू अधिकारी की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि हज इस्लाम धर्म का एक अहम धार्मिक कर्तव्य है और इसकी व्यवस्थाओं में गैर-मुस्लिम की नियुक्ति मंजूर नहीं की जा सकती।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा
बरेली में प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि हज इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है, जिसे सक्षम मुसलमानों पर फर्ज माना गया है। हज कमेटी अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है, जिसका उद्देश्य हज यात्रियों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करना है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का आरोपउन्होंने आरोप लगाया कि देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी हिंदू अधिकारी को हज कमेटी का सीईओ बनाया गया है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि समुदाय को बदनाम करने वाला कदम है। मौलाना ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार में कई योग्य मुस्लिम अधिकारी मौजूद हैं, ऐसे में किसी मुस्लिम को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।
शहाबुद्दीन रजवी के अनुसार
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का कहना है कि जिस व्यक्ति को इस्लाम और हज से जुड़ी धार्मिक परंपराओं की जानकारी नहीं है, उसे इस तरह की अहम जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे सरकार का धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए चेतावनी दी कि मुसलमान इस तरह के कदमों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अंत में मौलाना ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि नियुक्त किए गए हिंदू सीईओ को तुरंत हटाया जाए और हज कमेटी के संचालन की जिम्मेदारी किसी ऐसे व्यक्ति को दी जाए, जो इस्लाम और हज की धार्मिक आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित हो।








