Depression: लंबे समय तक तनाव बन सकता है डिप्रेशन की वजह, जानिए दिमाग पर इसके खतरनाक असर

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नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लगभग हर व्यक्ति की समस्या बन चुका है। काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं, रिश्तों में खटास और भविष्य की अनिश्चितता मानसिक तनाव को बढ़ा देती हैं। किसी बात को लेकर थोड़ी चिंता होना सामान्य है, लेकिन अगर यह तनाव लंबे समय तक बना रहे तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

शरीर और दिमाग लगातार हो रही थकान

लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर और दिमाग लगातार थकान की स्थिति में रहते हैं। इससे एनर्जी लेवल कम हो जाता है, व्यक्ति दिनभर सुस्ती और कमजोरी महसूस करता है। नींद न आने की समस्या आम हो जाती है, जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा और उदासी बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे इंसान किसी भी काम में रुचि खोने लगता है और निराशा उसे घेर लेती है।

विशेषज्ञों के अनुसार

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव तंत्रिका तंत्र को “हाई अलर्ट मोड” में रखता है। दिमाग बार-बार खतरे के संकेत भेजता है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। इसका असर याददाश्त पर पड़ता है और चिंता, घबराहट व अवसाद जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने पर व्यक्ति खुद को असहाय और फंसा हुआ महसूस करने लगता है।

तनाव से कैसे निकलें?

सबसे पहला कदम है यह स्वीकार करना कि आप तनाव में हैं। इसके बाद अपने तनाव के असली कारण को पहचानें क्या यह काम का दबाव है, आर्थिक परेशानी है या पारिवारिक तनाव। जब कारण स्पष्ट हो जाए, तब समाधान ढूंढना आसान हो जाता है।

मानसिक तनाव को कम करने के लिए सोच में बदलाव जरूरी है। नकारात्मक विचारों की जगह सकारात्मक सोच अपनाने से दिमाग को राहत मिलती है। साथ ही, एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। रोजाना हल्का व्यायाम, योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की आदत तनाव को काफी हद तक कम कर सकती है।

भरपूर नींद लेना भी बेहद जरूरी है। रोज एक तय समय पर सोने-जागने की आदत डालें और सोने से पहले मोबाइल व टीवी से दूरी बनाएं। इसके अलावा, हेल्दी डाइट लें, ज्यादा कैफीन और शराब से बचें और पर्याप्त पानी पिएं।

सामाजिक जुड़ाव तनाव से बाहर निकलने में अहम भूमिका निभाता है। परिवार और दोस्तों से बात करें, अपनी भावनाएं साझा करें। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे, नींद न आए, हर समय उदासी या नकारात्मक सोच बनी रहे, तो बिना झिझक किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से मदद लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी इलाज या लाइफस्टाइल बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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