Justice Surya Kant:
चंडीगढ़, एजेंसियां। हरियाणा के हिसार जिले के छोटे-से गांव पेटवाड़ में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत की कहानी दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का अद्भुत उदाहरण है। तपती दोपहर में खेतों में गेहूं की मड़ाई करते समय एक किशोर ने आसमान की ओर देखकर खुद से कहा “मैं अपनी जिंदगी बदल दूंगा।” सरकारी स्कूल में बोरी पर बैठकर पढ़ने वाले उस लड़के ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वह देश की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे।
10 फरवरी 1962 को जन्मे सूर्यकांत पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत शिक्षक थे और माता शशि देवी गृहिणी। परिवार की सादगी और अनुशासन ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
कानूनी शिक्षा और संघर्षों की शुरुआत:
जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री हासिल की और उसी वर्ष हिसार जिला न्यायालय से वकालत की शुरुआत की। एक वर्ष बाद वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने चंडीगढ़ चले गए। 2011 में उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर भी किया।38 वर्ष की उम्र में वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने। 2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। अक्टूबर 2018 में वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश।
24 नवंबर 2025 को उन्होंने भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली और 9 फरवरी 2027 तक वे सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व करेंगे।
महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई अहम भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत कई ऐतिहासिक मामलों का हिस्सा रहे हैं:
- बिहार में मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए 65 लाख मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश।
- अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखने वाली संविधान पीठ के सदस्य।
- ओआरओपी योजना को वैध ठहराया तथा सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसरों का समर्थन।
- असम से जुड़े नागरिकता विवादों में धारा 6A की वैधता को बरकरार रखने वाले निर्णय का हिस्सा।
- दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य, हालांकि उन्होंने गिरफ्तारी को सही बताया था।
- निजी जीवन, रुचियां और विवाद:
जस्टिस सूर्यकांत की शादी 1980 में सविता शर्मा से हुई, जो कॉलेज प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उनकी दो बेटियां कानून में मास्टर डिग्री कर रही हैं। वे कविता लिखते हैं, खेती से प्रेम करते हैं, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करते हैं और पत्रकारिता के प्रशंसक हैं।
उनकी पुस्तक ‘Administrative Geography of India’ वर्ष 1988 में प्रकाशित हुई।
हिमाचल हाईकोर्ट में रहते हुए उन पर कुछ कदाचार के आरोप लगे, परंतु कोई भी साबित नहीं हो सका।








