ICSE-ISC exam pattern:
नई दिल्ली, एजेंसियां। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार करने जा रही है। इसके तहत बोर्ड कक्षा 11 और 12 के लिए प्रश्नपत्र की संरचना में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब परीक्षाओं में 50 प्रतिशत प्रश्न क्रिटिकल थिंकिंग यानी आलोचनात्मक चिंतन पर आधारित होंगे, जबकि शेष 50 प्रतिशत प्रश्न कॉन्सेप्ट बेस्ड यानी अवधारणात्मक ज्ञान पर केंद्रित होंगे। इस परिवर्तन का उद्देश्य छात्रों की विषय को समझने की गहराई, तार्किक सोच और विश्लेषणात्मक क्षमता का मूल्यांकन करना है। अब तक की प्रणाली में जहां मुख्य रूप से याददाश्त पर निर्भरता अधिक थी, वहीं अब छात्रों को ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने और विषय की मूलभूत समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
छात्रों को मिलेगी ये नई सुविधाएः
इसके साथ ही बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के छात्रों को एक और बड़ी सुविधा देने की घोषणा की है। अब ये छात्र अधिकतम तीन विषयों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का विकल्प चुन सकेंगे। यह कदम न केवल छात्रों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें डिजिटल युग की शिक्षा प्रणाली से भी बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करेगा। यह अहम निर्णय हाल ही में आयोजित एक क्षेत्रीय बैठक में लिया गया, जिसमें झारखंड ज़ोन के 172 स्कूलों के प्राचार्य शामिल हुए। बैठक में बोर्ड की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह बदलाव छात्रों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए किया गया है, जिससे शिक्षा केवल अंकों तक सीमित न रहकर वास्तविक समझ और कौशल पर आधारित हो सके।
शिक्षाविदो की रायः
शिक्षाविदों का मानना है कि यह बदलाव भले ही छात्रों के लिए शुरू में चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन इससे शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। छात्रों को अब पढ़ाई की दिशा बदलनी होगी रटने की बजाय विषयों को गहराई से समझने और तर्क के आधार पर विश्लेषण करने पर फोकस करना होगा। CISCE का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब परीक्षा प्रणाली में केवल अंक नहीं, बल्कि छात्रों की सोचने-समझने की असली क्षमता ही सफलता की असली कसौटी बनेगी।
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