Health insurance: GST में राहत लेकिन जेब पर मार: स्वास्थ्य बीमा हुआ 38% तक महंगा

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नई दिल्ली, एजेंसियां। जीएसटी सुधारों की घोषणा के बाद जहां कई क्षेत्रों में आर्थिक लाभ देखने को मिला, वहीं स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में उलटा असर देखने को मिल रहा है। बीमा कंपनियों ने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम में 10% से लेकर 38% तक की बढ़ोतरी कर दी है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार ने पर्सनल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी को 18% से घटाकर शून्य कर दिया था, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और बीमा की पहुंच बढ़ाई जा सके।

एलआईसी के अभियान को मिला बल, पर उपभोक्ता पर बढ़ा बोझ:

सरकार के इस निर्णय से एलआईसी के “हर घर बीमा” अभियान को बल मिला और बीमा क्षेत्र में रुचि बढ़ी। हालांकि, कई निजी बीमा कंपनियों ने इसका उलटा असर दिखाया। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल सेवाओं में बढ़ती महंगाई और नई सुविधाओं के कारण प्रीमियम में बढ़ोतरी करनी पड़ी। गैर-जीवन बीमा कंपनियों, जिनमें स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम शामिल हैं, का कुल प्रीमियम कलेक्शन 0.07% बढ़कर ₹29,617.60 करोड़ तक पहुंच गया।

महंगाई और नई सुविधाएं बनीं वजह:

बीमा कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मेडिकल लागत और तकनीकी अपग्रेडेशन के चलते बीमा कवर की लागत बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई कंपनियां पॉलिसी में छोटे बदलावों को ‘नई सुविधा’ बताकर अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

बीमा उद्योग से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीएसटी छूट का लाभ वास्तव में उपभोक्ताओं तक पहुंचे, न कि कंपनियों के मुनाफे में समा जाए। आने वाले महीनों में बीमा रेगुलेटर IRDAI से इस पर सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की उम्मीद है।

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