Chhath Puja 2025:
नई दिल्ली, एजेंसियां। छठ पूजा भारत का एक पवित्र और पारंपरिक पर्व है, जो सूर्य देव और छठी मईया की आराधना के लिए समर्पित है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देशभर में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय इसे बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। चार दिन चलने वाले इस महापर्व में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं।
छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसके पारंपरिक और सात्विक व्यंजन हैं, जिन्हें व्रती छठी मईया को अर्पित करते हैं। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा का भी अच्छा स्रोत माने जाते हैं।
ठेकुआ
ठेकुआ छठ पूजा का सबसे प्रमुख प्रसाद है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, घी और इलायची पाउडर से तैयार किया जाता है। खास लकड़ी के सांचे से इसका आकार दिया जाता है और फिर इसे देसी घी या तेल में तला जाता है। सूर्य देव को अर्पित करने के बाद यह प्रसाद परिवार और व्रती महिलाओं में बांटा जाता है।
रसीया खीर
गुड़ और चावल से बनी रसीया खीर खरना के दिन विशेष रूप से बनाई जाती है। इसमें दूध की जगह गुड़ और देसी घी का प्रयोग किया जाता है, जिससे इसका स्वाद सुगंधित और सात्विक बनता है।
कसार
कसार या कसार लड्डू चने के आटे (बेसन) को देसी घी में भूनकर और गुड़ मिलाकर बनाए जाते हैं। ये पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर होते हैं और छठी मईया को बहुत प्रिय माने जाते हैं।
पूड़ी और चना दाल
सप्तमी के दिन व्रती महिलाएं पूड़ी और चना दाल ग्रहण करती हैं। पूड़ी गेहूं के आटे से तैयार होती है और देसी घी में तली जाती है। चना दाल हल्के मसालों के साथ पकाई जाती है ताकि यह सात्विक बनी रहे।
कद्दू-भात
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद बनाया जाता है। कद्दू को सेंधा नमक और हल्दी के साथ पकाया जाता है। व्रतियों द्वारा इसे ग्रहण करना पूरे व्रत की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
इन पांच पारंपरिक व्यंजनों को बनाने और प्रसाद के रूप में अर्पित करने से छठ पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा है, बल्कि सांस्कृतिक और पारिवारिक सौहार्द का भी प्रतीक है।
इसे भी पढ़ें
Chhath Puja 2025: छठ महापर्व का महत्व और जानें नहाय खाए से लेकर उषा अर्घ्य की सही डेट

