Jana Nayagan Film:
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ इन दिनों सेंसर विवाद के चलते चर्चा में है। यह फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब तक इसे सेंसर बोर्ड से मंजूरी नहीं मिल पाई है। मामला मद्रास हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और 20 जनवरी को इस पर सुनवाई हुई, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। ‘जन नायकन’ की अटकी रिलीज ने करीब 20 साल पुरानी एक बॉलीवुड फिल्म की यादें ताजा कर दी हैं, जो इसी तरह सेंसर की अड़चनों में फंसने के बाद आखिरकार रिलीज हुई और ब्लॉकबस्टर साबित हुई। वह फिल्म थी—‘रंग दे बसंती’।
‘रंग दे बसंती’ की मुश्किल राह
आमिर खान, माधवन, सिद्धार्थ, शरमन जोशी, सोहा अली खान और कुणाल कपूर स्टारर फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को 19 जनवरी 2006 को रिलीज किया जाना था। लेकिन सेंसर बोर्ड और रक्षा मंत्रालय की आपत्तियों के चलते इसकी रिलीज टल गई। फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने हाल ही में इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों को फिल्म के सेना से जुड़े दृश्यों और संवादों पर आपत्ति थी। उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने वास्तविक शब्दों और संदर्भों को बदला नहीं, तो फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
निर्देशक की जिद बनी फिल्म की ताकत
मेहरा ने बताया कि उन्हें यह भी चेतावनी दी गई थी कि फिल्म की रिलीज छह हफ्ते आगे बढ़ सकती है, जिससे भारी नुकसान होगा। लेकिन उन्होंने अपनी बात पर अड़े रहने का फैसला किया। उनका कहना था कि फिल्म में दिखाया गया सब कुछ तथ्यात्मक है और वे सच्चाई से समझौता नहीं करेंगे। मामला आखिरकार तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी तक पहुंचा। उन्होंने फिल्म देखी और बाद में मामूली कट्स के साथ इसे मंजूरी दे दी गई।
देरी बनी वरदान
आखिरकार ‘रंग दे बसंती’ 26 जनवरी 2006 को गणतंत्र दिवस के मौके पर रिलीज हुई और यह देरी फिल्म के लिए वरदान साबित हुई। लगभग 28 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भारत में करीब 53 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, वर्ल्डवाइड कमाई लगभग 97 करोड़ रुपये रही। आज ‘जन नायकन’ की अटकी रिलीज के बीच ‘रंग दे बसंती’ की कहानी यह साबित करती है कि कभी-कभी सेंसर की अड़चनें भी इतिहास रचने का रास्ता खोल देती हैं।
