Delhi pollution protests:
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन में अचानक राजनीतिक और सुरक्षा विवाद खड़ा हो गया। पर्यावरण के मुद्दे पर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा के पोस्टर लहराए और उसके समर्थन में नारे लगाए। कई पोस्टरों पर हिडमा की तुलना स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा से की गई, जिससे विवाद और गहरा गया। पुलिस ने इसे गंभीर मामला मानते हुए अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है और अर्बन नक्सल लिंक की जांच शुरू कर दी है।
क्या हुआ प्रदर्शन में?
23 नवंबर को इंडिया गेट पर प्रदूषण के खिलाफ जुटे लोग “माड़वी हिडमा अमर रहे” और “हिडमा को लाल सलाम” जैसे नारे लगाते दिखे। कुछ पोस्टरों पर लिखा था- “बिरसा मुंडा से लेकर माड़वी हिडमा तक, जंगलों की लड़ाई जारी।”यानी सीधे तौर पर सदियों पुराने आदिवासी नायक और हाल ही में मारे गए नक्सली कमांडर को एक ही पंक्ति में रख दिया गया।पुलिस ने इसे राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा मानते हुए BNS की धारा 197 के तहत मामला दर्ज किया है।
कौन था माड़वी हिडमा?
- दंतेवाड़ा–बस्तर क्षेत्र का टॉप नक्सली कमांडर
- 26 बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड
- 350 से अधिक लोगों की हत्या में भूमिका
- 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश में एनकाउंटर में मारा गया
- उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम था
हिडमा भारतीय सुरक्षा बलों का सबसे वांटेड वामपंथी उग्रवादी था, जिसका मकसद सशस्त्र विद्रोह के जरिए राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ना था।
कौन थे बिरसा मुंडा?
- 19वीं सदी के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी
- ब्रिटिश शासन और शोषणकारी ज़मींदारी प्रथा के खिलाफ “मुंडा विद्रोह” के नेता
- धार्मिक–सामाजिक सुधारक
- आदिवासियों के लिए भूमि अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक
- ‘धरती आबा’ यानी धरती के पिता के नाम से सम्मानित
बिरसा मुंडा का संघर्ष स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ था। उनका लक्ष्य कभी हिंसक उग्रवाद नहीं रहा।
दोनों की तुलना क्यों गलत?
- बिरसा मुंडा जहां स्वतंत्रता आंदोलन के नायक हैं, वहीं हिडमा राज्य-विरोधी हिंसक गतिविधियों का आरोपित था।
- बिरसा का संघर्ष सामाजिक न्याय के लिए था; हिडमा की विचारधारा सशस्त्र उग्रवाद पर आधारित थी।
- बिरसा मुंडा लाखों आदिवासियों की प्रेरणा हैं, जबकि हिडमा को सुरक्षा एजेंसियों ने एक खतरनाक हिंसक उग्रवादी माना।
