Karan Johar:
मुंबई ,एजेंसियां। बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अपने व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए अंतरिम राहत की मांग की। जौहर का आरोप है कि अज्ञात और विभिन्न ऑनलाइन संस्थाएं उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, छवि, आवाज और पहचान का आर्थिक लाभ उठा रही हैं। इसमें सोशल मीडिया पोस्ट, फर्जी प्रोफाइल, अश्लील GIFs, मर्चेंडाइज और भ्रामक डोमेन नाम शामिल हैं।
अदालत की एकल पीठ, न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि अंतरिम राहत प्रदान की जाएगी और निषेधाज्ञा जारी की जाएगी। अदालत ने गूगल, मेटा और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को निर्देश दिए कि वे उल्लंघनकर्ता खातों के आईटी लॉग्स और मूल ग्राहक विवरण प्रस्तुत करें।
Karan Johar: करण जौहर के वकील
करण जौहर के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने अदालत को बताया कि यह सामग्री जानबूझकर उनके मुवक्किल की पहचान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से बनाई गई है और इसका उद्देश्य ट्रैफिक खींचकर कमाई करना है।
Karan Johar: पिछली सुनवाई
पिछली सुनवाई में अदालत ने गिफी, पिंटरेस्ट सहित अन्य प्लेटफॉर्म्स को समन जारी किया था, जबकि रेडबबल ने उल्लंघनकारी सामग्री हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया। अदालत ने जौहर से स्पष्ट सूची मांगी कि कौन से URLs और सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई चाहिए और सामग्री की श्रेणी (अपमानजनक, अश्लील, भ्रामक) भी स्पष्ट करने को कहा।
Karan Johar: दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट की यह कार्रवाई ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन के मामलों के समान है, जहां उच्च न्यायालय ने उनके नाम, छवि और आवाज़ के अनधिकृत उपयोग को निजता का उल्लंघन मानते हुए सुरक्षा प्रदान की थी।
करण जौहर के मामले में अदालत का यह संकेत उनकी पहचान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी चेतावनी है कि वे उल्लंघनों को गंभीरता से लें।
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