Delhi Blast: वाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश

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Delhi Blast:

नई दिल्ली,एजेंसियां। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम हुए कार धमाके की जांच ने भारत में सक्रिय एक वाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। इस धमाके में अब तक 12 लोगों की मौत और 24 घायल हुए हैं। जिस कार में विस्फोट हुआ, उसे कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. उमर नबी चला रहा था। उमर भी विस्फोट में मारा जा चुका है। वह फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। पुलिस ने शव के अवशेषों की पहचान के लिए उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया है।

जांच में क्या आया सामने?

जांच में पता चला है कि यह जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा मॉड्यूल था, जिसमें 8 आतंकी शामिल थे इनमें 6 डॉक्टर, एक मौलवी और एक इमाम हैं। इनमें से 4 डॉक्टर कश्मीर के हैं, जबकि 2 उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। फरीदाबाद, श्रीनगर और लखनऊ में लगातार छापेमार कार्रवाई चल रही है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और पुलवामा में लगातार कार्रवाई से उमर दबाव में था, जिसके चलते उसने अधूरा IED तैयार किया, जो समय से पहले ही फट गया। यही कारण रहा कि धमाका सीमित दायरे में रहा।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों के जड़ तक पहुंच चुकी है:

बता दे पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंच चुकी हैं। श्रीनगर के बनपोरा नौगाम इलाके में 19 अक्टूबर को लगे जैश के धमकी भरे पोस्टरों से एजेंसियों को सुराग मिला। इन पोस्टरों में सुरक्षा बलों के खिलाफ चेतावनी दी गई थी। इसी सूत्र ने पुलिस को मौलवी इरफान अहमद वाघे तक पहुंचाया, जिसकी गिरफ्तारी के बाद डॉ. मुजम्मिल और फिर डॉ. शाहीन शाहिद का नाम सामने आया। फिलहाल ये दोनों भी पुलिस के गिरफ्त में है। इतना ही नहीं यूपी एटीएस ने लखनऊ से डॉ. शाहीन के भाई डॉ. परवेज को गिरफ्तार किया है, जो असिस्टेंट प्रोफेसर है। इस मॉड्यूल की मुख्य साजिशकर्ता शाहीन को माना जा रहा है। वहीं, पुलवामा से तारिक नामक व्यक्ति को भी पकड़ा गया है, जिसने उमर को वह कार दी थी जिसमें विस्फोट हुआ।

फरीदाबाद में छापों के दौरान:

फरीदाबाद में छापों के दौरान करीब 2900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफलें, पिस्तौल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और बम बनाने का सामान बरामद हुआ है। पुलिस ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से 7 डॉक्टर, 5 छात्र और 1 युवती को हिरासत में लिया है। इनकी तयारियों को देख कर लाग रहा कि दिल्ली का ब्लास्ट एक टीज़र था इनका कई और शहरों में सीरियल धमाके करने की साजिश थी। गृह मंत्रालय ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है। गृहमंत्री अमित शाह ने लगातार दो उच्चस्तरीय बैठकें कीं। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क दो साल से सक्रिय था और भारत के कई बड़े शहरों में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहा था।

यह खुलासा दिखाता है कि अब आतंकी संगठन शिक्षित पेशेवरों और अकादमिक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं “वाइट कॉलर टेररिज्म” का यह चेहरा सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है।

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