Chidambaram attack:
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयकों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश तीन विधेयकों को “असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी” करार दिया है।
चिदंबरम ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा
चिदंबरम ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “कोई आरोप नहीं, कोई मुकदमा नहीं, कोई दोष सिद्ध नहीं, लेकिन एक गिरफ्तारी से चुने हुए मुख्यमंत्री को 30 दिनों में पद छोड़ना पड़ेगा। क्या आपने इससे ज्यादा अजीब कानूनी प्रावधान सुना है?”
उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि निचली अदालतें अब मुश्किल से ज़मानत देती हैं, और उच्च न्यायालय भी टालमटोल करते हैं। “सुप्रीम कोर्ट में हर महीने हज़ारों ज़मानत याचिकाएं आती हैं। 30 दिन की समयसीमा में क्या कोई न्याय मिल सकता है?” — उन्होंने सवाल उठाया।
चिदंबरम का कहना
चिदंबरम का कहना है कि इस प्रकार का कानून संविधान, संघीय ढांचे और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इसे सत्ता के दुरुपयोग का रास्ता बताया, जिससे चुनी हुई सरकारों को अस्थिर किया जा सकेगा।
अमित शाह का पक्ष
दूसरी ओर, अमित शाह ने लोकसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य “राजनीति में गिरते नैतिक मानकों को सुधारना और राजनीतिक ईमानदारी को स्थापित करना” है। यह बिल विपक्ष के विरोध के बीच संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे।चिदंबरम ने इस कानून को फर्जी गिरफ्तारी के जरिए सत्ता पलटने का औजार करार दिया और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक संस्थाओं से सजग रहने की अपील की।
इसे भी पढ़ें
