Anil Ambani:
नई दिल्ली, एजेंसियां। अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले से ही ईडी, सीबीआई और सेबी की जांचों के बीच अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने नई जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और CLE प्राइवेट लिमिटेड में फंड के कथित दुरुपयोग और हेराफेरी की जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में कंपनी अधिनियम (Companies Act) के तहत गंभीर गड़बड़ियों और धन गबन के संकेत मिले हैं।जांच अब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के हाथ में है। SFIO यह पता लगाएगा कि समूह की किन इकाइयों के बीच फंड ट्रांसफर हुआ, पैसे का प्रवाह कैसे हुआ और वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर किसकी भूमिका थी। जांच पूरी होने के बाद कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
ईडी ने 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां की जब्त:
ईडी ने हाल ही में रिलायंस ग्रुप की लगभग 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। इसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की 30 संपत्तियां और Adhar Property Consultancy, Mohanbir Hi-tech Build, Gamesa Investment Management, Vihaan43 Realty और Campion Properties शामिल हैं। ये अटैचमेंट रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बहु-करोड़ बैंक धोखाधड़ी मामलों से संबंधित हैं।
ईडी का मामला:
ईडी का मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी सहयोगी कंपनियों द्वारा 2010-2012 में लिए गए 40,185 करोड़ रुपये के ऋणों पर केंद्रित है। पांच बैंकों ने इन लोन खातों को फ्रॉड घोषित किया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन फंड्स को समूह की अन्य इकाइयों में घुमाया गया और पुराने कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किया गया, जो लोन शर्तों का उल्लंघन है।
2010-2012 के दौरान आरकॉम और उसकी समूह कंपनियों ने बैंकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए, जिनमें से 19,694 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं और ये खाते NPA बन चुके हैं। ऐसे में अनिल अंबानी की कंपनियों पर जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और संभावित कार्रवाई की राह पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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