Bengal SIR Case: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा, ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप

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Bengal SIR Case:

कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता से जुड़े SIR (Special Intensive Revision) मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम एफिडेविट दाखिल किया है। इस हलफनामे में आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मुख्यमंत्री चुनावी प्रक्रिया में सहयोग करने के बजाय लगातार बाधा उत्पन्न कर रही हैं और जनता को आयोग के खिलाफ भड़का रही हैं।

‘कानून अपने हाथ में लेने’ के लिए उकसाने का आरोप

एफिडेविट के अनुसार, ममता बनर्जी ने चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए, जिससे लोगों को “कानून अपने हाथ में लेने” के लिए उकसाया गया। आयोग का दावा है कि उनके बयान के बाद उत्तर दिनाजपुर जिले के चाकुलिया में लगभग 700 उपद्रवियों ने बीडीओ कार्यालय पर हमला किया। इस दौरान मतदाता सूची संशोधन से जुड़े कंप्यूटर और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

अधिकारियों में डर का माहौल

चुनाव आयोग ने कहा कि मुख्यमंत्री और तृणमूल के नेताओं के बयानों से ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। 14 जनवरी को ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक माइक्रो ऑब्जर्वर को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया और कथित रूप से डराया-धमकाया।

हिंसा से परेशान अधिकारियों का इस्तीफा

आयोग ने बताया कि 14 जनवरी को ही हिंसा और सुरक्षा की कमी के कारण 9 माइक्रो ऑब्जर्वरों ने अपने दायित्वों से मुक्त किए जाने की मांग की। इसके अलावा, आयोग ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक समूह, खासकर महिलाओं के समूह, अधिकारियों को घेरकर नारेबाजी कर रहे हैं और मतदाता सूची संशोधन के काम में बाधा डाल रहे हैं।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि स्थानीय पुलिस, चुनाव अधिकारियों की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरत रही है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था की स्थिति को अन्य राज्यों की तुलना में “चिंताजनक” बताया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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