Abbas Ansari got relief:
लखनऊ, एजेंसियां। मऊ सदर से विधायक रह चुके अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से सजा पर स्टे मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, लेकिन विधानसभा में उनकी विधायकी की वापसी अब भी पूरी तरह तय नहीं है।हाईकोर्ट ने सिर्फ सजा पर रोक लगाई है, लेकिन दोष सिद्ध होने के फैसले को रद्द नहीं किया है। इस कारण, कानूनी तौर पर उनकी सदस्यता स्वतः बहाल नहीं मानी जाएगी।
विधानसभा में एंट्री पर संशय क्यों?
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जब तक कोर्ट की ओर से सजा को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता या दोषमुक्त नहीं किया जाता, तब तक सदस्यता की बहाली नहीं हो सकती। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति आने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
सरकार जा सकती है सुप्रीम कोर्ट
सूत्रों की मानें तो सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है, जिससे अब्बास की सदस्यता बहाली की राह और लंबी हो सकती है।
अब्बास ने खुद को बताया विधायक
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब्बास अंसारी ने सोशल मीडिया पोस्ट में खुद को “विधायक, मऊ सदर” लिखा और फैसले को संविधान और न्याय की जीत बताया। इससे पहले उन्होंने ऐसे किसी भी पोस्ट में अपने नाम के साथ “विधायक” नहीं लिखा था।
क्या है मामला?
अब्बास अंसारी को एक हेट स्पीच केस में दोषी ठहराया गया था, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी, जिससे उनकी राजनीतिक वापसी की उम्मीद जगी है, मगर यह अभी भी कानूनी दांव-पेंच में उलझी हुई है।
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