India-US Trade Deal
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत बनाने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में आगे बढ़ना है। व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, यह ढांचा जल्द लागू किया जाएगा।
18 प्रतिशत टैरिफ कब और किन चीजों पर
अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 के तहत भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 18 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसमें कपड़ा-परिधान, चमड़ा-जूते, प्लास्टिक-रबर, जैविक रसायन, हैंडीक्राफ्ट, गृह सजावट के सामान और कुछ मशीनरी शामिल हैं।हालांकि, 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 में सूचीबद्ध कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क हटाने की बात भी कही गई है। इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न-हीरे और विमान के पुर्जे शामिल हैं।अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए शुल्क हटाए जाएंगे।
भारत की ओर से रियायतें
इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क कम या समाप्त करने पर सहमति जताई है। साथ ही कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। इनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।भारत चिकित्सा उपकरणों के व्यापार से जुड़ी बाधाएं दूर करने, आईसीटी उत्पादों के आयात लाइसेंस को सरल बनाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्वीकार करने पर भी सहमत हुआ है।
तकनीक, ऊर्जा और सप्लाई चेन पर सहयोग
दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा सहयोग, आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातुएं और तकनीकी उत्पाद खरीदने की मंशा जताई है।साथ ही GPU, डेटा सेंटर तकनीक और डिजिटल व्यापार नियमों पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
आगे का रोडमैप
भारत और अमेरिका इस अंतरिम समझौते को जल्द लागू कर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देश रूल्स ऑफ ओरिजिन, तकनीकी मानकों और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने पर मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।


















