US India energy partnership: अमेरिका ने बढ़ाया ऊर्जा सहयोग का हाथ, कह रहा भारत के लिए विश्वसनीय विकल्प बनने का दावा

4 Min Read

US India energy partnership

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी में आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन ‘रायसीना डायलॉग 2026’ के पहले दिन भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर अहम संकेत सामने आए। क्रिस्टोफर लैंडौ, जो United States Department of State में उप विदेश मंत्री हैं, ने कहा कि अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा का एक “विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोत” बन सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

ऊर्जा सुरक्षा पर अमेरिका का भरोसा

सम्मेलन के एक सत्र में बोलते हुए लैंडौ ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में अमेरिका जैसे ऊर्जा-समृद्ध देश भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थायी और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। लैंडौ ने यह भी संकेत दिया कि भारत को अपनी ऊर्जा निर्भरता के लिए स्थिर और भरोसेमंद साझेदारों की ओर देखना चाहिए, जिसमें अमेरिका प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

व्यापार समझौते से बढ़ेगी साझेदारी

लैंडौ ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित नए व्यापार समझौते को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उनके अनुसार यह समझौता आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा और व्यापार, निवेश तथा तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। यदि यह समझौता सफल होता है तो भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है।

तकनीक और एआई पर जोर

तकनीकी सहयोग पर बोलते हुए लैंडौ ने Artificial Intelligence को आने वाले समय की सबसे प्रभावशाली तकनीक बताया। उन्होंने भारत को “पैक्ससिलिका” (PaxSilica) नामक तकनीकी सहयोग फ्रेमवर्क में शामिल होने का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि नई तकनीकों की आपूर्ति श्रृंखला को साझा, सुरक्षित और लचीला बनाना जरूरी है।लैंडौ ने कहा कि तकनीक और नवाचार दोनों देशों की सबसे बड़ी ताकत हैं और आने वाले दशकों में भारत की प्रगति अमेरिका के रणनीतिक हितों के अनुरूप है।

विज्ञान कूटनीति पर भी चर्चा

सम्मेलन के दौरान पहली बार आयोजित रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया। इसमें दुनिया भर के लगभग 80 वैज्ञानिकों, राजनयिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और उभरती तकनीकों तथा विज्ञान कूटनीति के वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की।तीन दिनों तक चलने वाले ‘रायसीना डायलॉग 2026’ में करीब 110 देशों के 2700 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक रणनीति और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जो भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक साझेदारी को दिशा दे सकते हैं।

Share This Article