Neal Katyal Supreme Court case: ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट में झटका देने वाले नील कात्याल कौन हैं? भारत से है खास नाता

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Neal Katyal Supreme Court case:

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दुनिया भर पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी घोषित करते हुए अमेरिकी छोटे कारोबारियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस मामले में अहम भूमिका निभाने वाले वकील हैं भारतीय मूल के नील कात्याल, जिन्होंने अदालत में जोरदार बहस कर टैरिफ रद्द करवाने में सफलता हासिल की। कात्याल ने इस निर्णय को संविधान और कानून के शासन की बड़ी जीत बताया।नील कात्याल का जन्म 1970 में शिकागो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे, मां बच्चों की डॉक्टर और पिता इंजीनियर। कात्याल ने हार्वर्ड और येल लॉ स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में 20 साल से प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अब तक 54 मामलों में बहस की है।

टैरिफ रद्द होने के बाद कात्याल ने क्या कहा?

टैरिफ रद्द होने के बाद कात्याल ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रपति जितने भी शक्तिशाली हों, संविधान उनसे भी ज्यादा ताकतवर है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा प्रस्तुत मामले में राष्ट्रपति ने अनधिकृत तरीके से काम किया, जबकि अमेरिकी कानून के अनुसार केवल कांग्रेस ही टैक्स निर्धारित कर सकती है। कात्याल ने कहा, “अदालत ने कानून के शासन और अमेरिकी मूल्यों की रक्षा करते हुए फैसला सुनाया। यह सिर्फ ट्रंप के खिलाफ नहीं, बल्कि शक्तियों के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मामला था।”

कौन है नील कात्याल?

नील कात्याल पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं और अमेरिका की न्याय प्रणाली में उनका लंबा अनुभव है। उन्होंने अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के तहत भी काम किया और एडमंड रैंडोल्फ अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते। उनके कार्य से छोटे कारोबारियों को भारी राहत मिली है और भारत को भी अमेरिकी टैरिफ के घटने से व्यापारिक फायदे मिलेंगे।टैरिफ रद्द होने के बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश दिया कि कानून और संविधान हर किसी के ऊपर सर्वोच्च हैं। कात्याल ने मीडिया से कहा, “मैं अप्रवासियों का बेटा हूं और सुप्रीम कोर्ट में जाकर छोटे कारोबारियों के पक्ष में बहस कर पाया। आखिरकार अदालत ने हमारी दलील मानी और जीत हमारी हुई।”

इस ऐतिहासिक जीत ने नील कात्याल को अमेरिकी व्यापार और कानूनी दुनिया में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है और भारत के लिए भी गर्व का मौका पेश किया है।

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