Bengal elections
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम मोड़ सामने आया है। Trinamool Congress (टीएमसी) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर को अपनी नई पार्टी का नाम बदलना पड़ा है। चुनाव आयोग की आपत्ति के बाद उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (जेयूपी) से बदलकर ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (एजेयूपी) कर दिया है।
चुनाव आयोग ने खारिज किया पुराना नाम
मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने शुरुआत में अपनी पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखा था। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस नाम की सिफारिश दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय को भेजी थी।
हालांकि, आयोग ने यह कहते हुए नाम अस्वीकार कर दिया कि इसी नाम से पहले ही एक अन्य राजनीतिक दल पंजीकृत है।इसके बाद कबीर अपने प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली पहुंचे और नया नाम ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ प्रस्तावित किया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। उन्होंने कहा कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी नई पार्टी के बैनर तले उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
हुमायूं कबीर ने 22 दिसंबर 2025 को नई पार्टी बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों की सूची भी जारी कर दी थी। कबीर का कहना है कि उनकी पार्टी राज्य में एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच देने का प्रयास करेगी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और टीएमसी के खिलाफ अन्य दलों से गठबंधन की अपील भी की है।
टीएमसी से क्यों हुए निलंबित?
हुमायूं कबीर का निलंबन भी काफी विवादों में रहा था। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बेलडांगा में एक मस्जिद के शिलान्यास से जुड़े बयान के बाद पार्टी से निलंबित कर दिया था। कबीर ने कहा था कि प्रस्तावित मस्जिद का डिजाइन अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को ढहाई गई बाबरी मस्जिद जैसा होगा। इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया और पार्टी नेतृत्व ने उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
चुनावी रणनीति पर नजर
पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कबीर की नई पार्टी की एंट्री को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में उनका प्रभाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।








