Gautam Adani gas price hike
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की प्रमुख गैस वितरण कंपनियों में से एक अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने गैस का भाव लगभग तीन गुना बढ़ाते हुए ₹40 प्रति मानक घन मीटर (SCM) से सीधे करीब ₹119 प्रति SCM कर दिया है। इस फैसले का मुख्य कारण पश्चिमी एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी (LNG) की कमी बताया जा रहा है।
कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
कंपनी के इस फैसले से औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की उपलब्धता कम हो गई है और कंपनियों को महंगे वैकल्पिक स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ रही है। इसी वजह से अडानी टोटल गैस को कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि करनी पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी कई उद्योगों की उत्पादन लागत को सीधे प्रभावित कर सकती है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलएनजी के परिवहन के लिए इस्तेमाल होता है।
हाल के दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सुरक्षा चिंताओं और संभावित हमलों के खतरे के चलते कई जहाजों ने इस मार्ग से गुजरने से परहेज किया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
कतर से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित
भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। लेकिन मौजूदा हालात में ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के कारण कतर को कुछ एलएनजी प्लांट अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं।
समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण भारतीय कंपनियों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है। इसका असर घरेलू गैस आपूर्ति और कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
भारत के ऊर्जा आयात पर असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत और एलएनजी की जरूरतों का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 से 60 प्रतिशत एलएनजी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते ही देश तक पहुंचती है।
सप्लाई में आई इस रुकावट के कारण पेट्रोनेट एलएनजी और गेल जैसी कंपनियों ने भी गैस आपूर्ति में कटौती की आशंका जताई है।
उद्योगों और महंगाई पर असर
गैस की कमी के चलते कई औद्योगिक इकाइयों को अब फर्नेस ऑयल और नेफ्था जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करना पड़ रहा है, जो प्राकृतिक गैस की तुलना में कहीं अधिक महंगे हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ने और वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है।
इसी बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड, जो जनवरी-फरवरी 2026 में औसतन 66-67 डॉलर प्रति बैरल था, अब बढ़कर करीब 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो ऊर्जा की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा असर उद्योगों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।









