ED raids:
मुंबई, एजेंसियां। वसई-विरार इलाके में 41 अवैध आवासीय और व्यावसायिक इमारतों का निर्माण किया गया था, जिनमें से अधिकतर सरकारी और निजी जमीन पर बनी थीं। इसके अलावा, 60 एकड़ जमीन पर किए गए निर्माणों का भी खुलासा हुआ है, जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और डंपिंग ग्राउंड के लिए आरक्षित थी। सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स ने नगर निगम अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध निर्माण के लिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया था।
क्या कार्रवाई हो रही है?
ED की यह कार्रवाई इलाके में हड़कंप का कारण बन चुकी है। ईडी ने पूछताछ के लिए बिल्डरों और अन्य आरोपियों को बुलाया है और जल्द ही जांच की दिशा में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस मामले में यदि दोषी पाए गए तो न केवल वित्तीय लेन-देन की जांच होगी, बल्कि भविष्य में निर्माण परमिट जारी करने की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में आ सकती है।
इलाके में नागरिकों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई के बाद, स्थानीय नागरिकों में बड़ी उत्सुकता है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उन अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने इन अवैध निर्माणों को अनुमति दी थी। वसई-विरार क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं पर इन निर्माणों के कारण दबाव बढ़ा है, और अब नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
सूत्रों के मुताबिक
सूत्रों के मुताबिक, इस सप्ताह के अंत तक मामले में कुछ महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
इसे भी पढ़ें
गंगा, ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों पर पड़ेगा जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव : रिपोर्ट