Mumbai blast case:
मुंबई, एजेंसियां। साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में जान गंवाने वालों के परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इन धमाकों में मारे गए भायंदर निवासी बीएमसी कर्मचारी गोविंद सोलंकी के परिवार की पीड़ा एक बार फिर सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में सभी 12 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले ने मृतकों के परिजनों को झकझोर कर रख दिया है।
सोलंकी की पत्नी लीला सोलंकी
सोलंकी की पत्नी लीला सोलंकी, जो अब अपने पति की तस्वीर को लेकर मंदिरों में पूजा कर रही हैं, रोते हुए सिर्फ एक ही मांग कर रही हैं — “आरोपियों को फांसी दी जाए, हमारा सब कुछ ले लो, लेकिन इंसाफ दो।” हाई कोर्ट का फैसला उनके लिए जख्मों पर नमक जैसा रहा, खासकर तब जब यह निर्णय गोविंद के जन्मदिन के दिन 21 जुलाई को आया।
कितने लोगो की गई थी जान ?
धमाकों में 189 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। अब जबकि बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली, परिवारों की आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी है। देश की न्याय प्रणाली पर भरोसा जताते हुए पीड़ित परिजन फिर से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। यह मामला न सिर्फ न्याय में देरी की मिसाल बन गया है, बल्कि उन जख्मों की भी कहानी है जो सालों बाद भी ताजे हैं।
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