Skin Care
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल महिलाएं अपनी त्वचा की देखभाल को लेकर बेहद सतर्क हो गई हैं। सुबह क्लींजिंग, दिन में मॉइश्चराइजिंग और रात को त्वचा की रिपेयरिंग यह उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा स्किन केयर करना यानी ओवर-स्किनकेयर करना त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है। इसे ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम कहते हैं, जो त्वचा की प्राकृतिक परत को कमजोर कर सकती है।

ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम क्या है?
ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम में महिलाएं अपनी स्किन टाइप को समझे बिना ट्रेंडी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। बार-बार स्क्रब और एक्सफोलिएशन से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है। नतीजा जलन, लालिमा, खुजली, दाने या अचानक ब्रेकआउट के रूप में सामने आता है।
सोशल मीडिया और गलत तकनीक की भूमिका
सोशल मीडिया पर ‘ओवरनाइट ग्लो’ और इंस्टेंट ग्लो वीडियो देखकर कई लोग नए-नए सीरम और क्रीम आजमाने लगते हैं। ट्रेटिनॉइन, विटामिन सी और ग्लाइकोलिक एसिड जैसे इंग्रीडिएंट्स फायदेमंद हैं, लेकिन एक साथ या बार-बार इस्तेमाल करने से त्वचा को नुकसान हो सकता है। बार-बार चेहरा धोना, जोर से स्क्रब करना और केमिकल मास्क का अधिक इस्तेमाल प्राकृतिक ऑयल को खत्म कर देता है, जिससे त्वचा रूखी और संवेदनशील दिखने लगती है।
स्किन टाइप की समझ जरूरी
सेंसिटिव, ड्राय या ऑयली त्वचा के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं। बिना जानकारी के गलत प्रोडक्ट का इस्तेमाल जलन, पिंपल्स या रूखापन बढ़ा देता है। सही परिणाम के लिए अपनी स्किन टाइप पहचानना और उसी के अनुसार प्रोडक्ट चुनना जरूरी है।
बेसिक रूटीन और सैंडविच मेथड
विशेषज्ञ के अनुसार, ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम से बचने के लिए रूटीन को सरल रखें। सैंडविच मेथड (मॉइश्चराइजर–रेटिनॉइड–मॉइश्चराइजर) त्वचा को सुरक्षा देता है और जलन कम करता है। नए प्रोडक्ट अपनाने से पहले पैच टेस्ट करें।विशेषज्ञों का कहना है कि कम लेकिन सही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना, संतुलित देखभाल और अपनी त्वचा की जरूरत को समझना ही स्वस्थ, शांत और दमकती त्वचा की असली कुंजी है।








