मीना कुमारी इंडस्ट्री की एक ऐसी अदाकारा थीं जिनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने एक्टिंग के लिए कभी गिल्सरीन का इस्तेमाल नहीं किया। उनकी अभिनय में इतना दम था कि जब वे पर्दे पर रोती थीं, तो उनके आंसू निकल आते थे और सैकड़ों लोग उनके साथ रोते थे।
यूं तो मीना कुमारी की जिदंगी में खुशियां कम और गम ज्यादा रहे, लेकिन फिर भी उनकी जिंदगी का फलसफा गमगीन ही रहा। उन्होंने अपने से दोगुनी उम्र के डायरेक्टर कमाल अमरोही से शादी की थी, जो पहले से शादीशुदा थे। ये शादी उन्होंने अपने घरवालों को बताए बिना चोरी-छुपे की थी।
लेकिन किस्मत देखिये अपने पति के घर पहुंचने के बाद भी मीना की जिदंगी में सुकून नहीं था। जहां मैरिड लाइफ बिगड़ने लगी थी,वहीं उनका करियर ऊपर उठने लगा था। 1960 के दौरान वे बड़ी स्टार बन गई थीं।
इसी स्टारडम ने उनकी निजी जिदंगी में कड़वाहट भर दी। मीना कुमारी की सफलता कमाल अमरोही को खटक रही थी। दोनों के बीच कड़वाहट इस कदर बढ़ गई कि अमरोही ने मीना कुमारी को फिल्में छोड़ने के लिए कहा। दोनों के संबंध फिर भी नहीं सुधरे।
इसी बीच मीना कुमारी के जीवन में धर्मेंद्र आये, जो उनसे जूनियर थे. मीना कुमारी का उनसे जुड़ाव हो गया। इसी बीच कमाल ने फिल्म ‘पाकीजा’ बनाने की सोची,लेकिन वे भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे।
मीना ने अपनी सारी कमाई देकर पति की मदद की। ‘पकीजा’ में पहले धर्मेंद्र को साइन किया गया था, लेकिन उन दिनों मीना और धर्मेंद्र के अफेयर के चर्चे हर जुबान पर थे और इससे चिढ़कर उनके पति कमाल ने धर्मेंद्र को पाकीजा से निकालकर उनका रोल राजकुमार को दे दिया।
लेकिन यहां भी उनके साथ धोखा हो गया। वही राजकुमार जो फिल्मों में अपनी डायलॉग डिलीवरी की वजह से जाने जाते थे वह मीना के साथ सेट पर काम करते समय अपने डायलॉग भूल जाते थे।
बस मीना की मुंह की तरफ ही ताकते रहते थे। कमाल को राजकुमार से भी जलन होने लगी थी। लेकिन पाकीज़ा आधे से ज्यादा बन चुकी थी इसलिए धर्मेंद्र की तरह राजकुमार को बाहर का रास्ता दिखाना मुमकिन नहीं था।
इस बात का राजकुमार ने भी बखूबी फायदा उठाया और वो अक्सर वो फिल्म पाकीज़ा के सेट पर ही कमाल अमरोही के सामने ही मीना कुमारी से फलर्ट करते जिसे देख कर कमाल खून का घूंट पी कर रह जाते। उन्होंने भी फिल्म में दोनों के बहुत ही कम सीन साथ में करवाए।
लेकिन फिल्म का एक गाना बेहद रोमांटिक था और उसे फिल्माया जाना भी बहुत जरूरी था। कमाल ने मीना की आंखों से ही प्यार बरसाने की कोशिश करवाई थी, दोनों को साथ में ज्यादा ना दिखाकर खूबसूरत रोमांटिक मौसम और नजारों पर ज्यादा फोकस किया था।
वह गाना था- “चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो” . इसके बाद कमाल अमरोही ने राजकुमार को अपनी किसी फिल्म में नहीं लिया। फिल्म पाकीज़ा बनने के दौरान दोनों के संबंध लगातार खराब होते गए नौबत तलाक तक पहुंच गई थी।
‘पाकीजा’ का निर्माण भी रूक गया। लंबे अर्से बाद सुनील दत्त और नर्गिस ने इसकी शूटिंग शुरू करवाई।
कहते हैं कि फिल्म ‘काजल’ (1965) राजकुमार ने मीना के साथ इसलिए की थी क्योंकि इसमें उनके साथ उन्हें रोमांस का खूब मौका मिल रहा था। राजकुमार रोमांटिक हीरो नहीं थे, लेकिन ‘काजल’ में एक बेहद रोमांटिक ” गाना छू लेने दो नाजुक होठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये, ” उन पर और मीना कुमारी के बीच फिल्माया जाना था।
निर्माता-निर्देशक राम माहेश्वरी राजकुमार से यह कहने में हिचक रहे थे, लेकिन जैसे ही राजकुमार के कानों में यह बात पड़ी, कहते हैं कि वह उछल पड़े थे और बोले थे कि ” कौन नहीं चाहेगा मीना जी के साथ इतना रोमांटिक गाना करना” इस फिल्म में धर्मेंद्र भी थे,लेकिन मीना और राजकुमार ने सिर्फ इस गाने से खूब सुर्खियां लूटी थीं।
धर्मेंद्र के कैरियर को ऊंचाई पर ले जाने में मीना कुमारी ने काफी मदद की। लेकिन कहते है की धर्मेंद्र ने उन्हें इस्तेमाल करके छोड़ दिया। इससे उनका दिल टूट गया। कमाल अमरोही के रूखेपन से आहत और फिर धर्मेंद्र के किनारा कर लेने से वो गम और शराब में ऐसी डूबी की मौत को गले लगा कर ही मानी।
मीना कुमारी का व्यक्तित्व अद्भुत था, उनकी आवाज में अजीब सी कशिश थी उनकी नजरें बोलती थीं लेकिन जिंदगी ने मीना कुमारी को इतने दर्द दिये कि वह ”ट्रेजिडी क्वीन ” बन कर ही इस दुनिया से विदा हुई।
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