Waqf Law: वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में जस्टिस मसीह की टिप्पणी: “इस्लाम तो इस्लाम ही रहेगा, चाहे कोई कहीं भी रहे” [Justice Masih’s comment in the Supreme Court hearing on Waqf law: “Islam will remain Islam, no matter where one lives”]

2 Min Read

Waqf Law:

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 पर चल रही सुनवाई के दौरान जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किए जाने पर कि ट्राइबल क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय इस्लाम का पालन अन्य क्षेत्रों के मुसलमानों से अलग तरीके से करते हैं, जस्टिस मसीह ने कहा, ‘इस्लाम तो इस्लाम ही रहेगा, कोई कहीं भी रहे, धर्म वही रहेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक प्रथाओं में भिन्नता हो सकती है, लेकिन धर्म वही रहता है।

Waqf Law: केंद्र सरकार ने अदालत को बताया

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का आवश्यक धार्मिक अभ्यास नहीं है। इसलिए, इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि ट्राइबल क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिमों की जमीनों को वक्फ के नाम पर हड़पने की शिकायतें आई हैं, जो असंवैधानिक हैं।

Waqf Law: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछे तीखे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे और हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताई, लेकिन वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 पर रोक लगाने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि यदि केंद्र सरकार हमारे सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं देती है, तो हम अंतरिम आदेश पारित करेंगे। इससे पहले, अदालत ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि ‘हर कोई चाहता है उसका नाम अखबारों में छपे’, जो याचिकाकर्ताओं के इरादों पर सवाल उठाता है।

इसे भी पढ़े

Waqf Act: वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 73 याचिकाएं दायर, आज से सुनवाई शुरू

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं