नई दिल्ली। भारत में मोटापे से ग्रस्त बच्चे-किशोरों की संख्या 1.25 करोड़ पहुंच गई है। ये आंकड़े डरानेवाले हैं।
WHO द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में मोटापे की दर चौगुनी हो गई है। बच्चों के लिए आरोग्य एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
भारत में मोटापा एक बड़ी बीमारी बनकर उभरा है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार 05 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 1.25 करोड़ बच्चे-किशोर मोटापे का शिकार हुए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इन 1.25 करोड़ बच्चों में 73 लाख लड़के और 52 लाख लड़कियां शामिल हैं।
दुनिया भर में मोटापे से ग्रस्त बच्चों, किशोरों और वयस्कों की कुल संख्या एक अरब से अधिक हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा के अनुसार, दुनियाभर के बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर पिछले 30 साल में चौगुनी हो गई है।
1990 के बाद से मोटापा अधिकतर देशों में कुपोषण का सबसे आम रूप बन गया। ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर माजिद इज्जती के अनुसार यह बहुत चिंताजनक है कि मोटापे की महामारी जो 1990 में दुनिया के अधिकतर हिस्सों में वयस्कों में नजर आती थी, अब स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में भी साफ दिखाई देती है।
इसके अलावा, खासकर दुनिया के कुछ सबसे गरीब हिस्सों में करोड़ों लोग अब भी कुपोषण से पीड़ित हैं। कुपोषण के दोनों रूपों से सफलतापूर्वक निपटने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम स्वस्थ एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ाएं और इसे किफायती बनाएं।
वहीं भारत में महिला वयस्कों में मोटापे की दर 1990 के 1.2% से बढ़कर 2022 में 9.8% और पुरुष वयस्कों में मोटापे की दर 0.5% से बढ़कर 5.4% हो गई है।
वर्ष 2022 में लगभग चार करोड़ 40 लाख महिलाएं और दो करोड़ 60 लाख पुरुष मोटापे का शिकार थे। मोटापे की दर वयस्क महिलाओं में दोगुनी से अधिक और वयस्क पुरुषों में लगभग तिगुनी हो गई।
अध्ययन के अनुसार, 2022 में 15 करोड़ 90 लाख बच्चे एवं किशोर और 87 करोड़ 90 लाख वयस्क मोटापे की समस्या से जूझ रहे।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 190 से अधिक देशों के पांच वर्ष या उससे अधिक उम्र के 22 करोड़ से अधिक लोगों के वजन और लंबाई का विश्लेषण किया।
इसमें 1,500 से अधिक शोधकर्ताओं ने योगदान दिया। उन्होंने यह समझने के लिए ‘बॉडी, मास, इंडेक्स’ का विश्लेषण किया कि 1990 से 2022 के बीच दुनिया भर में मोटापे और सामान्य से कम वजन की समस्या में क्या बदलाव आया।
अध्ययन में पाया गया कि 1990 से 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर मोटापे की दर लड़कियों और लड़कों में चार गुना से अधिक हो गई है।
और यह चलन लगभग सभी देशों में देखा गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार सामान्य से कम वजन वाली लड़कियों का अनुपात 1990 में 10.3 प्रतिशत से गिरकर 2022 में 8.2 प्रतिशत हो गया और लड़कों का अनुपात 16.7 प्रतिशत से गिरकर 10.8 प्रतिशत हो गया है।
लड़कियों में सामान्य से कम वजन की दर में कमी 44 देशों में देखी गई, जबकि लड़कों में यह गिरावट 80 देशों में देखी गई।
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