बंगाल ट्रेन हादसे का ड्रोन व्यू देख दहल जायेगा दिल; हादसे का सच-खराब थी सिग्नलिंग प्रणाली [Drone View of Train Accident in West Bengal]

5 Min Read

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं। खास कर इसका ड्रोन व्यू देख दिल दहल जाता है कि कैसे एक बोगी के कागज के पन्नों की तरह चिथड़े-चिथड़े उड़ गये हैं।

यह सोच कर रूह कांप जाती है कि इस डब्बे के अंदर बैठे यात्रियों का क्या हुआ होगा। सच यह मंजर बहुत ही खतरनाक है।

उधर रेलवे बोर्ड की ओर से बड़ा बयान आया है। रेलवे बोर्ड ने सोमवार देर रात को कहा कि पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना में प्रथम दृष्टया लगता है कि दुर्घटना मालगाड़ी की ओवर स्पीड के कारण हुई है।

इसके बाद दुर्घटना के लिए खराब स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली भी है। इस कारण मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस को टक्कर मारी।

बता दें कि सोमवार को दार्जिलिंग में रानीपतरा रेलवे स्टेशन चत्तर हाट जंक्शन मार्ग पर हुई दुर्घटना में सात यात्रियों और दो रेलवे कर्मचारियों की मौत हो गई। हादसे में 41 लोग घायल भी हुए हैं।

मालगाड़ी के चालक को रेड सिग्नल क्रॉ स करने की थी अनुमति

रेलवे बोर्ड ने कहा कि सिग्नलिंग प्रणाली के कारण मालगाड़ी के चालक को आरएनआई और सीएटी के बीच सभी रेड सिग्नल को पार करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन मालगाड़ी की गति बहुत ज्यादा थी, जो हादसे का कारण बनी।

काफी स्पीड से चल रही थी मालगाड़ी

रेलवे बोर्ड ने कहा कि मालगाड़ी का चालक काफी तेज गति से मालगाड़ी चला रहा था और इस कारण यह आरएनआई और सीएटी के बीच कंचनजंगा एक्सप्रेस से टकरा गई।

बोर्ड ने उन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुर्घटना में मारे गए चालक को रानीपतरा के स्टेशन मास्टर द्वारा टीए 912 नामक एक लिखित अनुमति दी गई थी जिसमें उसे सभी लाल सिग्नल पार करने का अधिकार दिया गया था।

बोर्ड ने कहा कि कंचनजंगा एक्सप्रेस के चालक ने स्वचालित सिग्नल प्रणाली में खराबी के दौरान अपनाए जाने वाले मानदंडों का पालन किया था।

सभी लाल सिग्नल पर एक मिनट तक रुका और 10 किमी प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ा, लेकिन मालगाड़ी के चालक ने मानदंडों की अनदेखी की जिससे यात्री ट्रेन को पीछे से टक्कर मार दी।

खराब थी स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली

इधर, मिल रही जानकारी के अनुसार आरएनआई और सीएटी के बीच स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली सोमवार सुबह 5.50 बजे से खराब थी।

ट्रेन नंबर 13174 (सियालदह-कंचनजंगा एक्सप्रेस) सुबह 8:27 बजे रंगापानी स्टेशन से रवाना हुई और आरएनआई और सीएटी के बीच रुकी रही।

ट्रेन के रुकने का कारण पता नहीं है। रेलवे के एक अन्य अधिकारी के अनुसार जब स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली विफल हो जाती है, तो स्टेशन मास्टर टीए 912 नामक एक लिखित अधिकार पत्र जारी करता है, जो चालक को गड़बड़ी के कारण सेक्शन में सभी लाल सिग्नल को पार करने के लिए अधिकृत करता है।

रानीपतरा के स्टेशन मास्टर ने ट्रेन नंबर 13174 (सियालदह-कंचनजंगा एक्सप्रेस ) को टीए 912 जारी किया था।

उन्होंने बताया कि लगभग उसी समय एक मालगाड़ी, जीएफसीजे, सुबह 8:42 बजे रंगापानी से रवाना हुई और 8:55 बजे कंचनजंगा एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप गार्ड का कोच, दो पार्सल कोच और एक सामान्य सीटिंग कोच (यात्री ट्रेन का) पटरी से उतर गये।

घटना के बाद रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने कहा कि न्यू जलपाईगुड़ी के निकट टक्कर संभवतः इसलिए हुई क्योंकि मालगाड़ी ने सिग्नल की अनदेखी की और अगरतला से सियालदह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस को टक्कर मार दी।

हालांकि, लोको पायलट संगठन ने रेलवे के इस बयान पर सवाल उठाया है कि चालक ने रेल सिग्नल का उल्लंघन किया।

भारतीय रेलवे लोको रनिंगमैन संगठन (आईआरएलआरओ) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहा कि रेलवे बोर्ड का यह कहना गलत है कि चालक को लाल सिग्नल पर एक मिनट के लिए ट्रेन रोकनी चाहिए और टीए 912 मिलने के बाद सीमित गति से आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोको पायलट की मौत हो जाने और सीआरएस जांच लंबित होने के बावजूद लोको पायलट को ही जिम्मेदार घोषित करना अत्यंत आपत्तिजनक है।

इसे भी पढ़ें

जलपाईगुड़ी रेल हादसे के 15 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा; गंभीर रूप से घायलों को मिलेंगे 2.5 लाख 

Share This Article
Exit mobile version