रिनपास की पीएचडी-एमफिल इंट्रेंस में पेपर लीक का दावा जांच में गलत निकला [Rinpas’ claim of paper leak in PhD-MPhil entrance turned out to be false in investigation]

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रांची। रांची यूनिवर्सिटी द्वारा रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास) में पीएचडी और एमफिल प्रवेश परीक्षा 23 जून को आयोजित की गई थी।

इस परीक्षा के एक सप्ताह बाद अभ्यर्थी द्वारा रांची विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पेपर लीक की लिखित शिकायत की गई थी।

वीसी डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने मामले की गंभीरता से लेते हुए डीएसडब्ल्यू प्रो. सुदेश कुमार साहू की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी।

सदस्यों में मारवाड़ी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनेाज कुमार, रिनपास की डायरेक्टर और सदस्य सचिव परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष कुमार झा थे।

3 सदस्यीय कमेटी ने की जांचः

जांच कमेटी ने सूक्ष्मता से की गई शिकायत की जांच की। सोशल मीडिया को खंगाला। अभ्यर्थी के पेपर लीक का दावा गलत साबित हुआ।

जांच कमेटी द्वारा एक-दो दिनों में यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। बताते चलें कि यूनिवर्सिटी अधिकांश अधिकारियों ने शिकायत मिलने के साथ कहा कि साक्ष्य के नाम पर कुछ नहीं है।

लेकिन वर्तमान समय में नेशनल स्तर पर पेपर लीक का मामला सुर्खियों में है। इसलिए जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी।

4 दिन में हुई जांचः

अभ्यर्थी द्वारा आधारहीन शिकायत की जांच में अधिकारियों का चार दिन समय लगा। शिकायत में लीक के अलावा पिछले वर्ष हुई परीक्षा से प्रश्न रिपिट करने का दावा किया गया था।

लेकिन जांच टीम के दो सदस्यों को पिछले साल से सिर्फ दो प्रश्न रिपिट मिले थे।

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