नयी दिल्ली, एजेंसियां : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि एक “विशेषाधिकार प्राप्त वंशानुक्रम” उसी कानून के शासन का विरोध कर रहा है, जो उन्हें जवाबदेह बनाता है।
उन्होंने उन लोगों की आलोचना भी की जो अपने खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होते ही सड़कों पर उतर जाते हैं।
धनखड़ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एक परिवर्तनकारी बदलाव देखा गया है, जिसके तहत कानून के समक्ष समानता की अवधारणा मजबूत हुई है।
उन्होंने अपने आधिकारिक आवास पर एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “हर कोई कानून के प्रति जवाबदेह है। एक समय था जब कुछ लोग सोचते थे कि वे कानून की पहुंच से परे हैं।”
धनखड़ के हाल ही में नॉर्थ ब्लॉक के पास नवनिर्मित ‘उपराष्ट्रपति एन्क्लेव’ में चले जाने के बाद यह पहला कार्यक्रम था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कानून के सामने सभी के समान होने की अवधारणा का सीधा परिणाम यह हुआ है कि असमानताएं “अंतर्विष्ट” हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि जब कानून अपना काम करता है तो लोगों को कानूनी उपाय अपनाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, जब कानूनी प्रक्रिया शुरू होती है तो मुझे समझ नहीं आता कि लोग सड़कों पर क्यों उतरते हैं… हमें सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायिक प्रणाली मजबूत, कुशल और निडर है और जिन लोगों को लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, उन्हें अदालतों का रुख करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। हर कोई कानून के प्रति उत्तरदायी है, कानून के प्रति जवाबदेह है। आप कानून से बच नहीं सकते।”
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