New rent rules India: क्या पूरे देश में लागू हो गए नए रेंट नियम? जानिए सच्चाई

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New rent rules India:

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया पर इन दिनों “नए रेंट नियम 2026” को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सरकार ने किराया कानून में बड़े बदलाव करते हुए मकान मालिकों और किराएदारों के लिए कई नए नियम लागू कर दिए हैं। हालांकि फैक्ट चेक में यह दावा भ्रामक साबित हुआ है और ऐसे किसी नए कानून के लागू होने की पुष्टि नहीं हुई है।

वायरल पोस्ट में क्या दावा किया जा रहा है?

वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि किराए से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मकान मालिक अब दो महीने से ज्यादा एडवांस किराया नहीं ले सकते, किराएदार को बिना कानूनी प्रक्रिया के घर से नहीं निकाला जा सकता और किराया समझौते को डिजिटल स्टांप के साथ 60 दिनों के अंदर रजिस्टर कराना जरूरी होगा।इसके अलावा पोस्ट में यह भी कहा गया है कि साल में केवल एक बार किराया बढ़ाया जा सकेगा और इसके लिए मकान मालिक को 90 दिन पहले नोटिस देना होगा। साथ ही मकान मालिक को घर में प्रवेश करने से 24 घंटे पहले किराएदार को सूचना देना अनिवार्य होगा।

क्यों भ्रामक है यह दावा

फैक्ट चेक में सामने आया है कि “रेंट नियम 2026” नाम से देश में कोई नया कानून लागू नहीं किया गया है। दरअसल वायरल पोस्ट में जिन नियमों का जिक्र किया गया है, उनमें से कई प्रावधान मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 से जुड़े हैं।यह कानून केंद्र सरकार द्वारा एक गाइडलाइन के रूप में जारी किया गया था, ताकि राज्य सरकारें इसके आधार पर अपने-अपने किराया कानून तैयार कर सकें। लेकिन यह पूरे देश में एक साथ लागू होने वाला कानून नहीं है।

राज्यों के अधिकार में आते हैं किराया कानून

भारत में जमीन और आवास से जुड़े कानून राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए किराया नियम बनाने या उनमें बदलाव करने का अधिकार भी राज्य सरकारों के पास ही होता है। यही कारण है कि किसी एक नियम को पूरे देश में एक साथ लागू नहीं किया जा सकता।

कुछ राज्यों ने अपनाए प्रावधान

सरकारी जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर अपने नियम तैयार किए हैं। इनमें असम, अरुणाचल प्रदेश और कुछ केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों को भी अपने किराया कानूनों में संशोधन करने की सलाह दी गई थी।

सोशल मीडिया पर बढ़ी भ्रम की स्थिति

विशेषज्ञों का कहना है कि अधूरी जानकारी के साथ किए गए ऐसे दावे किराएदारों और मकान मालिकों के बीच भ्रम पैदा करते हैं। इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना जरूरी है।

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