जानिए बुद्ध पूर्णिमा में स्नान – दान का महत्व और शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। वैशाख माह की पूर्णिमा को ही बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है।

क्योंकि मान्यता यह है कि इस दिन को भगवान विष्णु के अवतार भगवान बुद्ध का जन्म तिथि माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान को बहुत ही शुभ माना गया है।

बुद्ध पूर्णिमा पर खास योग क्या है…?

इस वर्ष के बुद्ध पूर्णिमा पर कई खास योग बन रहे हैं जिसके कारण स्नान और दान का महत्व और भी बढ़ गया है।

क्योंकि इस दिन नदियों में स्नान करने और दान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

बुद्ध पूर्णिमा पर कई खास योग क्या है….?

इस वर्ष के बुद्ध पूर्णिमा पर कई खास योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्ध और शिव योग बन रहे हैं।

इसके साथ ही इस दिन शुक्र और सूर्य की युति से शुक्रादित्य योग और गुरु और शुक्र की युति से गजलक्ष्मी राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। ये खास योग बुद्ध पूर्णिमा का महत्व और बढ़ा रहे हैं।

बुद्ध पूर्णिमा पर शुभ समय कब है…?

इस वर्ष के बुद्ध पूर्णिमा पर स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजकर 4 मिनट से सुबह 5 बजकर 26 मिनट का समय सबसे उत्तम है।

वैशाख पूर्णिमा की पूजा के लिए सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट का समय अच्छा है।

वैशाख पूर्णिमा को चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ होता है। चंद्रोदय समय रात 7 बजकर 12 मिनट है।

बुद्ध पूर्णिमा की पूजा कैसे करें…?

वैशाख पूर्णिमा पर सुबह पवित्र नदी में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को गंगाजल से अर्घ्य दें।

इसके बाद पीपल के पेड़ को पानी दें। बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

इसलिए भगवान विष्णु के सामने घी का दीया जलाएं और पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। इसके साथ ही आप विष्णु चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का भी पाठ करें।

बुद्ध पूर्णिमा पर क्या दान करें….?

भगवान विष्णु की पूजा के बाद पानी से भरा घड़ा और मिठाई ब्राह्मण को दान में दें। इस दिन मिट्‌टी के घड़े का दान सर्वोतम फल देने वाला माना गया है।

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