इन बातों का रखें ख्याल, बढ़ेगा नवजात का वजन

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नई दिल्ली, एजेंसियां। हर नए-नए माता-पिता को अपने बच्चे के वजन को लेकर चिंता बनी रहती है।

क्योंकि जन्म के कुछ दिनों बाद बच्चे का वजन घटने लगता है। खासतौर से 0-6 महीने तक के बच्चों के साथ ऐसा होता है।

डॉक्टर्स के अनुसार, फॉर्मूला दूध पीने वाला बच्चा जीवन के पहले कुछ दिनों में अपने जन्म के वजन का लगभग 3 से 4 प्रतिशत कम कर लेता है। वहीं स्तनपान करने वाले बच्चे का वजन 6 से 7 प्रतिशत के बीच कम हो सकता है।

इसके बाद, जब बच्चे को मां के दूध से भरपूर पोषण मिलता है, तो वजन अपने आप बढ़ने लगता है।

चाइल्ड स्पेशलिस्ट एंड पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट बताते हैं कि भारत में जन्मे बच्चों का वजन सामान्य तौर पर 2.5 किलो होता है।

इससे कम वजन वाले बच्चे को लो बर्थ वेट और वजन इससे ज्यादा हो तो बच्चे को हेवी बर्थ वेट मानते हैं।

जो बच्चा पूरे 9 महीने में जन्म लेता है, जिन्हें प्रीटर्म बेबी कहते हैं, उसका वजन आमतौर पर 2.5 किलो का होता है, जबकि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों का वजन कम होता है।

प्रीटर्म वाले बच्चे का वजन हर दिन 20-30 ग्राम बढ़ता है, इसका मतलब है कि एक महीने में 600-900 ग्राम बढ़ पाता है।

ऐसे में मां हफ्ते में एक बार बच्चे का वजन चेक कर सकती है। अगर बच्चे का वजन 150-200 ग्राम बढ़ रहा है, तो चिंता करने की बात नहीं है।

बच्चे का वजन घटने लगे तो घबराएं नहीं

जन्म के शुरुआती 3-5 दिनों में बच्चें का वजन कम हो जाता है। इस तरह का वेटलॉस सामान्यत है।

इसके बाद 10 दिनों में बच्चा फिर से वेट गेन कर लेता है। इसलिए अगर ऐसा हो रहा है, तो माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।

यह एकदम नॉर्मल है। अगले 10 दिनों में बच्चा जो वेट गेन करेगा , यहीं से उसके वजन बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

हालांकि 6 महीने के बाद बच्चे का वजन फिर से कम हो सकता है।

6 महीने में डबल हो जाता है वजन

एक्सपर्ट के अनुसार बच्चे का वजन 5-6 महीने में दोगुना हो जाता है। अगर बच्चा 3 किलो का हुआ है , तो 5-6 महीने में वजन 6 किलो हो जाएगा।

एक साल में वजन ट्रिपल हो सकता है। अगर ऐसा है, तो समझिए कि बच्चे का वजन सही तरीके से बढ़ रहा है।

स्वस्थ तरीके से वजन कैसे बढ़ाएं

0-6 महीने तक के बच्चों को मां के दूध से ही संपूर्ण पोषण मिलता है। जो मां बच्चे को स्तनपान कराती है, उनके बच्चे कम बीमार पड़ते हैं, इसलिए उनका वजन काफी अच्छा होता है।

एक्सपर्ट की सलाह है कि जहां तक संभव हो, बच्चेक को मां का दूध पिलाना चाहिए। भूलकर पानी भी ना दें। क्योंकि ब्रेस्ट मिल्क में 85-90 फीसदी पानी होता है।

दिन में बच्चे को कितनी बार दूध पिलाना चाहिए

एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे को हर दो से तीन घंटे में मां को बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। जो बच्चे‍ जल्दी सो जाते हैं, उन्हें हल्का सा सहला कर दूध पिला सकते हैं। बच्चा हर 3 घंटे में 8-12 बार दूध पिए, यही कोशिश करनी चाहिए।

नाइट फीडिंग बहुत जरूरी है

एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चा अगर रात में दूध की मांग करता है, तो दो से तीन बार दूध पिलाना चाहिए। बच्चे की ग्रोथ के लिए नाइट फीडिंग बहुत जरूरी है।

मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए क्या करें

इसके लिए सबसे पहले खुद मां को पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। ब्रेस्टफीडिंग या लैक्टेशन के वक्त अपनी जरूरत से 500-600 कैलोरी भी ज्यादा लेनी होगी।

कुल मिलाकर यह ध्यान रखें कि खाना एक नहीं बल्कि डेढ़ आदमी के हिसाब से खाना है।

बच्चे के वजन का बढ़ना पूरी तरह से मां के खानपान और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसलिए नई मां को पूरा आराम दें, अच्छी नींद लेने दें और तनाव से दूर रखें।

इसके अलावा आयरन और कैल्शियम की टेबलेट का सेवन जरूर करना चाहिए।

मां को दिन में कितना पानी पीना चाहिए

चाइल्ड स्पेशलिस्ट कहते हैं कि नई मां के लिए हाइड्रेशन बहुत जरूरी है। हर मां को अपनी बॉडी के लिए 2 लीटर पानी पीना है।

फीडिंग के दौरान एक गिलास अतिरिक्त पानी पीएं। अगर 8-10 बार आपने बच्चे को दूध पिलाया है, तो आपको 200 मिली पानी पीने की जरूरत है।

पानी से मतलब किसी भी तरल पदार्थ से है, जैसे आप जूस, सूप, नारियल पानी और लस्सी पीकर भी खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं।

इन फूड्स से बढ़ाएं बच्चे का वजन

स्तनों में दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ड्राई फ्रूट्स और नट्स खाने चाहिए। ये हाई कैलोरी फूड है।

इससे प्रोटीन और फैट मिलता है, जो ब्रेस्ट मिल्क के जरिए बच्चे के शरीर में पहुंचता है। इसके अलावा तिल और गोंद के लड्डू के जरिए भी बच्चेे को बेहतरीन पोषण मिल सकता है।

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